- संपादक चैपाल में वक्ताओं ने रखी बात, कहा- मीडिया हुई है दुर्दशा का शिकार

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। पत्रकारिता के क्षेत्र में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति विशिष्ठ है, क्योंकि उसकी आत्मा जिंदा है। पत्रकारिता में भी समय के साथ- साथ कई परिवर्तन देखने को मिले हैं, लेकिन पत्रकारिता का अपना स्थान हमेशा से कायम था और आगे भी रहेगा। संपादक विचारों को प्रतिपादित करने वाली संस्था है। ये बातें वरिष्ठ विचारक एवं पत्रकार राजेंद्र शर्मा ने कही। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में चल रहे मीडिया महोत्सव के अंतिम दिन संपादक चैपाल में कई वरिष्ठ संपादकों ने अपने विचार व्यक्त किए। राजेंद्र शर्मा ने कहा कि गौरव ज्ञान उचित है, किंतु पुरानी ही परपंराओं का अनुसरण हो यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत समृद्घ इसीलिए रहा कि हमने किसी को बांधकर नहीं रखा। भारत ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विचारों का हमेशा से स्वागत किया है। प्रलय से ही सृष्टि निर्माण की संभावना हमारे विचारों में है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन समाज में व्यक्तियों में गुणों का संचार करता है।

संपादकों का अस्तित्व खतरे में हैः एनके सिंह

आज संपादकों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। ये पत्रकारिता के लिए बेहद खतरनाक है। आज की पत्रकारिता पूरी तरह से बाजारवाद पर आकर टिक गई है। हालांकि पहले के दौर में भी कई बार संपादकों को अपना अस्तित्व बचाना पड़ा है, लेकिन वर्तमान दौर में पूरी तरह से खतरा है। ये बातें वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि मीसाबंदी के दौरान भी कई बार समाचार पत्रों की स्वतंत्रता पर हमले हुए हैं। समाचार पत्रों में लिखने से रोका गया है। उस दौरान भी यह स्थिति रही कि समाचार पत्रों से संपादकों को हटाकर सत्ताधारी दल के पदाधिकारियों को कमान सौंप दी गई, लेकिन इसके बावजूद भी कई संपादक ऐसे रहे, जिन्होंने पत्रकारिता का वजूद बचाए रखा।

शिव अनुराग पटैरिया ने कहा कि पत्रकार और पत्रकारिता के सामने आज विश्वसनीयता का बड़ा संकट खड़ा हुआ है। पहले पत्रकार एवं नेता-अफसरों में विश्वास का अभाव नहीं था। कई मौकों पर वे पत्रकारों के सामने ही गोपनीय बातें करते थे, लेकिन वे कभी भी समाचार पत्रों में नहीं छपती थी। उन्होंने कहा कि कई मौके ऐसे आए जब उनके सामने ही कई बेहद गोपनीय बातें की गईं, लेकिन आज के समय में नेता, मंत्री, अफसर पत्रकारों से परदादारी करते हैं। इस मौके पर पत्रकार सतीश एलिया, जयदीप कार्णिक, प्रकाश हिन्दुस्तानी संपादक विषय पर अपनी बात रखी। रघु ठाकुर ने कहा पत्रकारों से हमारी अपेक्षाएं उतनी ही हो, जो व्यवहारिक हो। समाज पत्रकारों से उम्मीद करता है, लेकिन समाज के अपने उत्तरदायित्व पूरे नहीं करता। इस दौरान मंच पर प्रदेश के पूर्व डीजीपी एसके राउत भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क के पूर्व संचालक लाजपत आहूजा ने किया।

नेता, अधिकारियों, मंत्रियों से ज्यादा ताकतवर मीडियाः फूलबासन देवी

जनसंवाद चैपाल में पद्मश्री फूलबासन देवी ने कहा है कि आज भी नेता, अधिकारी और मंत्रियों से ज्यादा हमारे देश की मीडिया ताकतवर है। मीडिया की ही देन है कि वे आज इस मुकाम पर पहुंची है।

दिल्ली से आए मौलाना सोहेब कासमी ने कहा कि हमारे देश में हमेशा से ही फूट डालो और शासन करो की नीति अपनाई जाती रही है। यही नीति देश की दो बड़ी आबादी के साथ भी अपनाई गई, इसीलिए वे एक-दूसरे को समझने में नाकाम हुए हैं। कासमी ने कहा है कि हमारे देश में वर्तमान में जो हालात बने हुए हैं, उन्हें समझाने में कहीं न कहीं मीडिया की असफलता मानना चाहिए। मीडिया सही दिशा में लोगों को समझाने में नाकाम साबित हुआ है। वे बोले कि आज दिल्ली के कई क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं,लेकिन जब उनसे पूछो कि वे यहां क्यों आए हैं तो उन्हें मालूम ही नहीं है। यह स्थिति क्यों बनी? महोत्सव में डिजिटल मीडिया चैपाल भी हुई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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