लोकरुचि व्याख्यानमालाः मानव संग्रहालय में डॉ. ईओ टिलनर का 'पद्मश्री डॉ. वीएस वाकणकर और मध्य भारत के शैलचित्र' विषय पर व्याख्यान

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय लोकरुचि व्याख्यानमाला के अंतर्गत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के प्रसिद्घ पुरातत्ववेत्ता, डॉ. ईओ टिलनर ने 'पद्मश्री डॉ. वीएस वाकणकर और मध्य भारत के शैलचित्र' विषय पर व्याख्यान के दौरान अपने यात्रा वृतांतों का स्मरण करते हुए बताया कि मोहनजोदारो, सांची, पुरी, भुवनेश्वर, ऐहोल और कई दक्षिण भारत के मंदिरों को देखने के बाद मेरी पुरातत्व में रुचि बढ़ी। मेरी यात्राओं में मेरे ट्रक की अहम भूमिका रही, जिसमें मैं अपनी जरूरत का सामान लेकर निकला था। इस दौरान मध्य भारत के कई पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण किया, जिसमें भीमबैठिका और सांची भी शामिल थे। उज्जौन में हमने डॉ.वीएस वाकणकर के साथ सतपुड़ा रेंज और भानपुरा क्षेत्र का गहन निरीक्षण भी किया। भोपाल में डॉ.वाकणकर ने एक प्रसिद्घ कलाकार और चित्रकार सचिदा नागदेव से हमारा परिचय कराया। वह और उनके परिवार ने हमें इस अभियान में और बाद के अभियानों में बहुत मदद की। एक चित्रकार के रूप में श्री नागदेव रॉकआर्ट में बहुत रुचि रखते थे। धारवाड़ में हम डॉ. सुंदरा से मिले जिन्होंने हमें हम्पि और आसपास के आकर्षक रॉकआर्ट साइट्स दिखाईं। 1982 में हमने डॉ. वाकणकर के साथ एक और अभियान किया। इस बार मुख्य लक्ष्य पचमढ़ी की महादेव पहाड़ियों की अद्भुत चट्टानें थीं। यात्रा के दौरान एक 16 एमएम की फिल्म बनाई जो बाद में टीवी पर जर्मन भाषी देशों में दिखाई गई थी। इस फिल्म को उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान दिखाते हुए उपस्थित श्रोताओं से अपना अनुभवन साझा किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के संयुक्त महानिदेशक (सेवानिवृत्त) डॉ. एसबी ओटा ने बताया कि टिलनर के इस व्याख्यान में वर्णित बहुत से स्थल आज विश्व धरोहर बन चुके हैं। उन्होंने इस व्याख्यान में प्रदर्शित छायाचित्रों और फिल्म को संग्रहालय के अभिलेखागार में देने हेतु डॉ. टिलनर से अनुरोध किया।

डॉ.टिलनर के बारे में

प्रारंभ में कार्यक्रम समन्वयक डॉ.सूर्य कुमार पांडे ने डॉ.टिलनर का परिचय देते हुए कहा कि डॉ.एकेडे ओलाफ टिलनर का जन्म 14 जुलाई 1935 को इंडोनेशिया के सुमात्रा में हुआ था। वियना में आपने 1955 से 1962 तक चिकित्सा की और इसके अलावा पुरातत्व और प्रागैतिहास में पढ़ाई की। बाद में उन्होंने भारत की यात्रा का फैसला किया और 70 के दशक में आपके मित्र ने तमिलनाडु की रॉकपेंटिंग और मेगालिथिक देखने के बाद शैलकला चित्रों के जानेमाने विद्वान डॉ. लोथर वेंके से संपर्क कर 1974 एवं 1977 में प्रो. वकांकर को साथ लेकर अच्छी तरह से सतपुड़ा रेंज और भानपुरा एरिया का निरीक्षण किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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