- जहांगीरिया स्कूल की गिरी दीवार, निगम की लापरवाही नोटिस तक सीमित रही कार्रवाई

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

राजधानी में रोज हो रही बारिश से शहर के जर्जर भवन धराशायी हो रहे हैं। लगातार तीसरे दिन मकान गिरने का सिलसिला जारी रहा और गुरुवार को पुराने शहर के जहांगीरिया स्कूल की जर्जर दीवार गिर गई। नगर निगम ने जर्जर दीवार को तोड़ दिया। इसके साथ ही यहां एक अन्य जर्जर भवन भी तोड़ा गया। इस घटना से किसी तरह की अनहोनी नहीं हुई।

नगर निगम के सर्वे में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 731 जर्जर भवन चिन्हित किए गए थे, इनमें से 300 भवन अति जर्जर पाए गए थे। यानी ये कभी भी गिरने की स्थिति में हैं। फिर भी निगम ने कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी, लेकिन अति जर्जर भवनों को नहीं तोड़ा गया। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यांत्रिकी शाखा के इंजीनियरों की मानें तो बारिश में जर्जर इमारतों के गिरने की आशंका अधिक होती है। गर्मी की तेज तपन दीवारों को कमजोर कर देती है। लगातार बारिश के कारण इनकी स्थिति अधिक खराब हो जाती है।

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100 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं इमारतें

शहर में 127 से अधिक ऐसे भवन हैं, जो 100 साल से भी अधिक पुराने हो चुके हैं। इनकी संख्या पुराने भोपाल में ज्यादा है। इनमें इमामी गेट, इकबाल मैदान, चौक बाजार, हमीदिया रोड, पीर गेट, जुमेराती क्षेत्र शामिल हैं। इसी तरह ऐशबाग के जनता क्वार्टर भी गिर सकते हैं। इन मकानों में रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं कराया गया।

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तीन दिन में हुए हादसे

- 10 सितंबर को मारवाड़ी रोड की खजांची गली में दो मंजिला इमारत का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। भीड़भाड़ नहीं थी, इसलिए बड़ा हादसा टल गया।

- 11 सितंबर को पुराने शहर के तीन स्थानों पर जर्जर भवन गिरने की घटनाएं हुईं। इनमें से एक नूरमहल रोड पर दुकान और इसके ऊपर मकान ढह गया। सिलावटपुरा में एक दो मंजिला मकान गिरा। चांदबड़ विजय नगर में दीवार गिर गई।

- 12 सितंबर को जहांगीरिया स्कूल की दीवार गिर गई।

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इनका कहना

कई जर्जर भवनों को तोड़ा गया है, हां ये सही है कि जर्जर भवनों पर कार्रवाई की जरूरत है। हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कई जगह जर्जर भवनों से लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट भी किया गया है।

विजय दत्ता, आयुक्त नगर निगम