- 2008 में इस सोसायटी में हुए घोटाले को लेकर सीबीआई में चल रही है जांच

- ईओडब्ल्यू को लिखा गया है पत्र

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

विवादों में रही रोहित गृह निर्माण सोसायटी के 24 संचालक और अध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज करने के लिए सहकारिता विभाग ने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनवेषण ब्यूरो) को पत्र लिखा है। इधर, इस मामले में सीबीआई को पत्र लिखकर ऑडिट रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए सीबीआई को सहकारिता विभाग ने जो पत्र लिखा था, उस पर सीबीआई ने रिकॉर्ड देने से मना कर दिया है।

बता दें कि 27 जुलाई 2003 से 10 अगस्त 2007 और 29 जून 2008 से लेकर 29 जून 2013 के बीच रहे संचालक मंडल के सदस्य और तत्कालीन सदस्यों सहित 24 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनके जवाब देने के लिए कार्यालय में उपस्थित रहने के लिए कहा गया था। सभी सदस्यों ने नोटिस का जवाब तो दिया, लेकिन रिकॉर्ड किसी ने उपलब्ध नहीं करवाया। क्योंकि अधिकांश संचालकों का कहना है कि उनके पास सोसायटी के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं है, क्योंकि 2008 में इस सोसायटी में हुए घोटाले को लेकर सीबीआई जांच चल रही थी। लिहाजा, सीबीआई सारा रिकॉर्ड जब्त कर ले गई। इसमें सभी मूल दस्तावेज थे।

- इनके खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने 2005 के बोर्ड को आखिरी मानते हुए अपराध दर्ज करने के लिए पत्र लिखा है। इसमें अमरनाथ मिश्रा, राम बहादुर, अनिल कुमार, रेवत सहारे, अमित ठाकुर, एमडी सलोडकर, जगदीश चंद्र कोडपाल, अरुण भागोलीवाल, बालकिशन मिजावे, सीएस वर्मा, सविता जोशी, सुशीला पुरोहित, सीमा सिंह के नाम शामिल हैं। 2003 से लेकर 2007 के संचालक मंडल में जो लोग रहे, उसमें एनएल रोहितास पूर्व अध्यक्ष, अयूब खान पूर्व उपाध्यक्ष, केएस ठाकुर पूर्व संचालक, मेहरबान सिंह वासमद्र, कांतसिंह, एमएल राजपूत, बसंत जोशी, ज्योति तारण, गायत्री महेश्वरी, तुलसीराम चंद्राकर, घनश्याम सिंह राजपूत सहित अन्य का नाम शामिल है।

- 2005 के बाद नहीं हुआ ऑडिट, 2007 में 29 प्लाट में हुई थी धोखाधड़ी

सहकारिता विभाग के अफसरों ने जब समिति का रिकॉर्ड खंगाला तो उन्हें कुछ नहीं मिला। इसके बारे में सदस्यों से पूछताछ की तो पता चला कि रिकॉर्ड का 2005 के बाद ऑडिट ही नहीं कराया, न रिकॉर्ड की जानकारी दी गई। इतना ही नहीं 2007 में 29 प्लाट के आवंटन और इसकी रजिस्ट्री फर्जी तरीके से दस्तावेजों में हेरफेकर कर की गई थी। वर्तमान में गृह निर्माण समिति के 511 सदस्य ऐसे हैं, जिनके पाए एक-एक प्लाट की दो-दो रजिस्ट्री हैं। शिकायतों के पुलिंदे बंधते गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 2009 में तत्कालीन कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव के समय में समितियों में फर्जीवाड़े को लेकर बड़े स्तर पर जांच कराई थी।