Minimum Support Price of Vegetables in Madhya Pradesh: भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। प्रदेश में सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करके किसानों को उपज का वाजिब दाम दिलाने के लिए शिवराज सरकार नीति बनाने की तैयारी कर रही है। इसमें सिर्फ सब्जियों का न्यूनतम मूल्य ही तय नहीं होगा बल्कि प्रसंस्करण और भंडारण की व्यवस्था भी होगी। किसानों को प्रशिक्षण दिलाने के साथ बाजार को भी विस्तार दिया जाएगा। छोटी-छोटी मंडियां भी स्थापित की जा सकती हैं ताकि किसानों का परिवहन में लगने वाला खर्च कम हो सके। समर्थन मूल्य तय करने के लिए जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है, वहीं किसान और व्यापारियों से भी संवाद किया जा रहा है। इस तमाम कवायद के बीच किसानों ने उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाह से कहा कि प्रदेश में सभी जगह कोल्ड स्टोरेज की क्षमता भी बढ़ाई जाए।

प्रदेश में सब्जी उत्पादक किसानों की हमेशा शिकायत रही है कि उन्हें उपज का वाजिब दाम नहीं मिलता। बंपर पैदावार हो जाए तो फसल कटवाना या तुड़वाना महंगा पड़ता है और कीमत अधिक हो तो मुनाफा व्यापारी कमा ले जाता है। इधर, उपभोक्ताओं को भी सब्जी महंगी दर पर मिलती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केरल सहित अन्य राज्यों में सब्जी उत्पादक किसानों के लिए लागू व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने को लेकर दो दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश सोमवार को दिए थे।

उद्यानिकी विभाग ने इसे लेकर जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंडी बोर्ड से मंडियों का रिकॉर्ड लिया जा रहा है, वहीं व्यापारी और कृषकों से भी उनकी राय जानी जा रही है। इसको लेकर उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह ने विभागीय अधिकारियों के साथ किसानों से फीडबैक लिया।

सूत्रों के मुताबिक किसानों ने जिलों में एक बड़ी मंडी की जगह कई उप मंडियां बनाने, परिवहन के लिए पास बनाने, कोल्ड स्टोरेज और छोटी-छोटी प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने, खेतों में फेंसिंग के लिए अनुदान दिलाने, ऋण लेने की सीमा बढ़ाने, मंडियों में स्टोरेज की व्यवस्था बनवाने, फसलवार किसानों का पंजीयन करवाकर प्रशिक्षण दिलवाने और जिला स्तर पर सब्जी उत्पादक किसानों की समिति बनाने के सुझाव मिले हैं।

किसानों का कहना है कि सीजन पर जब बड़ी मात्रा में फसल आती है तो कीमत गिर जाती है। व्यापारी इसका लाभ उठाता है और औने-पौने दाम पर उपज ले जाता है। कई बार व्यापारी ही किसान को खाद-बीज खरीदने के लिए राशि उपलब्ध कराता है और फसल पहले से तय व्यापारी को देने की शर्त रखता है। इससे किसान का शोषण होता है।

अगले सप्ताह सीएम को सौंपेंगे रिपोर्ट

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के लिए अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है। केरल में समर्थन मूल्य तय करने के अलावा अन्य कदम भी उठाए गए हैं। वहां प्राथमिक सहकारी समितियां इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वहां सब्जियां अन्य जगहों से भी आती हैं, जबकि, मध्य प्रदेश की स्थिति अलग है। यहां सब्जियां भरपूर उगाई जाती हैं और अन्य राज्यों को आपूर्ति भी की जाती है। ऐसे में सभी पहलूओं को मद्देनजर रखते हुए ही नीति बनाई जाएगी। उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि सभी पक्षों से चर्चा करने के बाद रिपोर्ट तैयार करके मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगी। विभागीय अधिकारी इसे अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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