शशिकातं तिवारी, भोपाल। आमतौर पर मंत्री व अफसरों के आने पर दफ्तरों में जो नजारा दिखता है वैसा ही सोमवार को राज्य खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला में भी दिखा। स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट यहां माइक्रोबायोलॉजी लैब के शुभारंभ के पहले दोपहर 12:30 बजे परिसर में ही खड़ी चलित औषधि लैब देखने पहुंचे। उनके साथ अफसर भी थे। लैब का इंजन स्टार्ट था। अपने अंदाज में मंत्री ने पूछा-इसमें क्या होता है। अफसर बोले औषधियों की जांच के लिए यह चलित लैब है। उन्होंने दिखाने को कहा तो सब ड्राइवर को तलाशने लगे। एक मिनट तक इंतजार करने के बाद मंत्री पास में खड़ी चलित खाद्य लैब देखने चले गए। प्रदेश में 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान चल रहा है। इसके बाद भी यह हाल है। कुछ देर बाद आए ड्राइवर ने जो बाते कहीं वह चौकाने वाली थीं। ड्राइवर ने कहा कि वह खाद्य लैब चलाता है न कि चलित औषधि लैब। उसने बताया कि औषधि लैब में तो कोई ड्राइवर ही नहीं है। इसके पहिए भी जाम हैं। टायर घिसे हैं।

पुरानी 108 एंबुलेंस को लैब बनाया गया है, पर इसमें न तो कोई उपकरण लगाए गए हैं न ही ड्राइवर व लैब टेक्नीशियन तैनात किया गया है। मंत्री को दिखाने के लिए दूसरी बैटरी लगाकर चलित लैब को स्टार्ट किया गया था। बता दें कि खाद्य पदार्थों की जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास तीन चलित लैब हैं, पर औषधियों की जांच के लिए एक भी चलित लैब नहीं है।

अब खाने-पीने की चीजों में हेवी मेटल की भी हो सकेगी जांच

खाने-पीने की चीजों में कीटनाशक, हेवी मेटल, बैक्टीरिया, फंगस आदि जीवाणुओं की मौजूदगी पता चल सकेगी। इसके लिए सोमवार को राज्य खाद्य प्रयोगशाला में माइक्रोबायोलाजी लैब शुरू की गई है। एक महीने तक ट्रायल के बाद प्रदेश भर से आने वाले सैंपलों में इन चीजों की जांच शुरू कर दी जाएगी। इससे लैब की जांच की क्षमता भी बढ़ जाएगी। अभी साल में करीब 4 हजार सैंपल जांचने की क्षमता है। अब यह बढ़कर 7 हजार तक हो जाएगी। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट व स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने लैब का शुभारंभ किया। करीब 11 करोड़ रुपए से यह लैब बनाई गई है।

पहली मंजिल पर बनी यह लैब दो हिस्सों में है। एक तरफ माइक्रोबायोलॉजी लैब है। सिविल कार्य व मशीनरी मिलाकर इसमें 2 करोड़ 85 लाख रुपए खर्च हुए हैं। दूसरी तरफ अन्य जांचों के लिए लिए लैब है। इसमें साढ़े आठ करोड़ रुपए की लागत से चार मशीनें लगाई गई हैं। संयुक्त नियंत्रक खाद्य व औषधि प्रशासन डीके नागेन्द्र ने बताया कि यह सभी मशीनें फूड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने दी है। मशीनें चलाने के लिए ऑपरेटर भी एफएसएसएआई ने दिए हैं।

आईसीपीएम मशीन - यह मशीन हेवी मेटल की जांच के लिए लगी है। लीथियम, मर्करी, जिंक, आर्सेनिक, निकिल, कॉपर, कैडमियम समेत 50 से ज्यादा हेवी मेटल की जांच की जा सकेगी। सीवेज से ऊगाई सब्जियों में हेवी मेटल होने की आशंका रहती है।

एलसीएमएस मशीन - इस मशीन से कीटनाशक,एंटीबायोटिक, विटामिन आदि की जांच हो सकेगी। दूध में यूरिया और डिटर्जेंट की मिलावट का पता भी इस मशीन से जांच में चल जाएगा। करीब दो घंटे के भीतर यह जांचें हो जाती हैं।

गैस क्रोमैटोग्राफी - इसकी दो मशीनें लगाई गई हैं। खाद्य पदार्थों में ऐसी चीजों की मिलावट की आंशका भी होती है जो उस चीज के अंदर गैस रूप में तब्दील हो चुकी होती हंै। इसका पता इसी जांच से चल सकेगा। मसलन लौकी, कद्दू को बड़ा करने के लिए आक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाने की आशंका रहती है। यह इंजेक्शन सब्जी में घुल जाता है। लिहाजा इसी जांच से इसे पकड़ा जा सकता है।

तैयार की जा रही हैं पांच और लैब : सिलावट

स्वास्थ्य मंत्री सिलावट ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अभी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पांच लैब और बनाई जा रही हैं। इनमें इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर में लैब का भूमिपूजन हो चुका है। करीब डेढ़ साल के भीतर इन लैब में खाद्य पदार्थों व दवाओं की जांच शुरू हो जाएगी। भारत सरकार ने हाल ही में सागर व उज्जैन में भी खाद्य व औषधि की जांच के लिए लैब बनाने को मंजूरी दी है। इन लैब के बनाने का काम भी जल्द शुरू होगा।

दूध में यूरिया की मिलावट होने पर तेज हुआ लैब बनाने का काम

माइक्रोबायोलॉजी लैब बनाने व लैब में जांच की सुविधाएं बढ़ाने का काम एक साल पहले पूरा हो जाना था। जांच के लिए मशीनें सालभर पहले आ गई थीं, पर सिविल कार्य पूरा नहीं होने की वजह से मशीनें नहीं लग पाई थीं। पिछले साल जुलाई में दूध में यूरिया और डिटर्जेंट की मिलावट सामने आने के बाद लैब के काम में तेजी आई।

Posted By: Prashant Pandey

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