भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। वैसे तो विधानसभा में शोरशराबा और हंगामा करने में हमेशा विपक्ष की भूमिका रहती है, लेकिन मप्र विधानसभा में पिछले चार दिन से सत्ताधारी दल के विधायक और मंत्री हंगामा मचाकर कार्यवाही बाधित कर रहे हैं।

यूपी में प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ हुई कार्रवाई के विरोध में शनिवार को मप्र विस में कांग्रेस के मंत्रियों ने हंगामा मचाया। मंत्री बार-बार निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति द्वारा कई बार चेतावनी देने के बाद भी मंत्री नहीं मानें तो उन्होंने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्रवाई शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों और खासतौर से मंत्रियों ने 17 मिनट तक प्रश्नकाल शुरू नहीं होने दिया। मंत्री जीतू पटवारी, सज्जन वर्मा और ओंकार सिंह मरकाम जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि आदिवासियों के आंसू पोछने गई प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ यूपी सरकार ने गलत कार्रवाई की। मरकाम भाजपा पर आदिवासियों पर अत्याचार करने के आरोप लगा रहे थे। विस अध्यक्ष ने कई बार मंत्रियों से शांत होने को कहा पर वे नहीं माने।

उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाएं तो नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विरोध किया कि जो घटना दूसरे राज्य की है, उसकी यहां चर्चा का क्या औचित्य है। इसके बाद फिर शोरशराबा बढ़ गया। इस पर विस अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि मुझे लोकसभा की नियमावली विधानसभा में लागू करने पर मजबूर न करो। नेता प्रतिपक्ष और संसदीय मंत्री से कहा कि वे अलग से इस मुद्दे पर चर्चा करें। फिर उन्होंने कार्यवाही पांच मिनट के लिए रोक दी।

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