भोपाल। विदेश मंत्रालय ने मध्य प्रदेश में पासपोर्ट से जुड़े 1600 से अधिक पुराने विवादित मामलों को दिसंबर में निपटाने का निर्णय किया है। नए साल में पासपोर्ट के लंबित मामलों को अटकाकर नहीं रखा जाएगा। विपरीत पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट, गलत जानकारी देने अथवा कोर्ट संबंधी प्रकरण छिपाने के चलते पासपोर्ट अटक गए हैं। मप्र में पिछले दो-तीन वर्षों से पासपोर्ट कार्यालयों में आवेदकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन भी अटक जाते हैं, जिनमें कई तरह की आपत्तियां लग जाती हैं।

पूछताछ के कारण अटके कई मामले

जून 2019 तक राज्य में 1600 से अधिक लोगों के पासपोर्ट सिर्फ इसलिए अटक गए क्योंकि आवेदकों से कुछ मामलों में पूछताछ की जानी है। ज्यादातर मामले विपरीत पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के हैं, इनमें कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें आवेदकों ने अपनी निजी जानकारियां पूरी नहीं दीं। कतिपय लोगों ने अदालत में चल रहे प्रकरणों की जानकारी पासपोर्ट आवेदन में दर्ज नहीं की।

2 लाख 23 हजार नए पासपोर्ट बने थे

प्रदेश की क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी रश्मि बघेल ने बताया कि यह पहला मौका है, जब प्रदेश के कई जिलों के 1600 आवेदकों को एक साथ जरूरी दस्तावेज लेकर बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि ये अटके मामले जून तक के हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले साल 2018-19 के दौरान मप्र में 2 लाख 23 हजार नए पासपोर्ट बने थे। इस साल नवंबर तक यह संख्या 1.85 लाख तक पहुंच गई है। लंबित मामले सुलझाने के लिए 2-5 दिसंबर तक पूरे सप्ताह तक सुनवाई का विशेष कार्यक्रम बनाया गया है।

Posted By: Sandeep Chourey