Morena Poisonous Liquor Case: भोपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। मुरैना में जहरीली शराब से मरने वालों को आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अब तब 21 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना के 40 घंटे बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई। इसमें घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने मुरैना कलेक्टर अनुराग वर्मा और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया को हटा दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव गृह डॉ.राजेश राजौरा की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित किया है। दल गुरुवार से जांच में जुटेगा। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी को साफ कर दिया है कि इस तरह की घटना की जिम्मेदारी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की होगी।सुनील पांडे को मुरैना का नया एसपी बनाया गया है।

बागचीनी थाने में पदस्थ सभी पुलिसकर्मियों को भी हटाया

देर रात मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुरैना जिले के बागचीनी थाने में पदस्थ सभी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटाया गया । बागचीनी थाने के अंतर्गत जिस बीट में जहरीली शराब का निर्माण हो रहा था उस बीट के सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया ।

मुख्यमंत्री ने मुरैना में जहरीली शराब की घटना को लेकर आपात बैठक में पूरा फीडबैक लिया और कहा कि यह अमानवीय और तकलीफ पहुंचाने वाली है। सरकार मिलावट के खिलाफ अभियान चला रही है फिर भी घटना दुखद है। ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे। मैं मूकदर्शक नहीं रह सकता हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि शराब व्यवसाय पर कड़ी निगरानी रखी जाए। आबकारी अमला पर्याप्त हो और जो पद रिक्त हैं, उन्हें भरा जाए।

बैठक में ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को घटना के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार मानते हुए तत्काल हटाने का निर्णय लिया गया। साथ ही उच्च स्तर जांच अपर मुख्य सचिव गृह से कराने का तय किया गया। गृह विभाग ने विशेष जांच दल में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए साई मनोहर और उप पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश शुक्ला को सदस्य बनाया गया है। जांच दल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करके रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देगा। बैठक में गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा, वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ.राजेश राजौरा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक लापरवाही के दोषी

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री को जो प्रारंभिक रिपोर्ट मिली है उसमें कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लापरवाही का दोषी माना गया है। घटना के बाद दोनों अधिकारियों ने वैसी सक्रियता नहीं दिखाई, जैसी दिखाई जानी चाहिए थी। न तो फैक्टरी में छापा मारा गया और न ही स्टॉक जब्त किया गया। मुख्यमंत्री दोनों अधिकारियों के रवैये से काफी नाराज हैं और जांच में इनके खिलाफ लापरवाही की बात प्रमाणित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

उज्जैन की घटना की पुनरावृत्ति

मुरैना में भी जहरीली शराब के मामले में उज्जैन की घटना की तरह प्रशासनिक लापरवाही बरती गई। घटना प्रकाश में आने के बाद भी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सक्रिय नहीं हुए। जबकि, एक अपर मुख्य सचिव ने फोन लगाकर इसको लेकर फटकार भी लगाई थी।उज्जैन की घटना के बाद प्रदेश भर में अवैध शराब को लेकर कहीं भी सक्रियता नहीं बरती गई, इसके बाद भी अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। अनुराग वर्मा को मंत्रालय में उपसचिव और अनुराग सुजानिया को पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक पदस्थ किया है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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