MP Assembly by elections भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। विधानसभा उपचुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने एक बार फिर आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। इस मामले में दलों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कोई खास असर नहीं पड़ा है। कोर्ट ने 13 फरवरी, 2020 को दलों से आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के चयन के कारणों का ब्योरा देने के लिए कहा था। साथ ही आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के चयन की स्थिति में कई बंदिशें भी लगाई थीं। फिर भी प्रदेश में 18 फीसद (63) आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 11 फीसद (39) पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

यह बात उम्मीदवारों के शपथ पत्र के आधार पर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने अपनी विश्लेषण रिपोर्ट में उजागर की है। इसने गंभीर अपराधों के आरोपितों को टिकट देने वाले दलों की कर छूट रद करने की सिफारिश की है। प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में 355 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें छह फीसद (22) महिला उम्मीदवार हैं।

दागी प्रत्याशियों में कांग्रेस सबसे आगे

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस में 50 फीसद (14) उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि है तो भाजपा में 28 में से 12 (43 फीसद) उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड है। बहुजन समाज पार्टी ने अापराधिक पृष्ठभूमि वाले 29 फीसद उम्मीदवारों को टिकट दिया है, तो समाजवादी पार्टी के 14 में से चार उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि है। इस बार 178 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। उनमें भी नौ फीसद आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उपचुनाव में 28 में से 10 ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें तीन या उससे अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपना आपराधिक रिकॉर्ड पेश किया है।

एडीआर की सिफारिश - हत्या, दुराचार, तस्करी, डकैती, अपहरण जैसे जघन्य अपराधों के दोषी उम्मीदवारों को स्थायी रूप से अयोग्य घोषित किए जाएं और ऐसे लोगों को टिकट देने वाले राजनीतिक दलों की टैक्स छूट रद की जाए। चुनाव से छह माह पहले भी गंभीर अपराधों के मामले प्रकाश में आने पर आरोपित उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया जाए। राजनीतिक दलों को आरटीआइ कानून में दायरे में लाया जाए। कोई राजनीतिक दल जानबूझकर आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार को खड़ा करता है तो उसका पंजीयन निरस्त किया जाए। चुनावी घोषणा पत्र में गलत जानकारी देने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करना चाहिए।

उम्मीदवारों की औसत संपत्ति उम्मीदवार संख्या - औसत संपत्ति 23 फीसद - 1.10 करोड़ रुपये 4 फीसद - 5 करोड़ रुपये से ज्यादा 7 फीसद - 2-5 करोड़ रुपये 22 फीसद - 50 लाख से दो करोड़ रुपये 28 फीसद - 10 से 50 लाख रुपये 39 फीसद - 10 लाख रुपये से कम संपत्ति की दलवार स्थिति भाजपा के 82, कांग्रेस के 79, बसपा के 46 और सपा के 14 फीसद उम्मीदवार करोड़पति हैं। आठ फीसद निर्दलीय भी इस श्रेणी में आते हैं।

उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा और कम संपत्ति

सांवेर से कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमचंद गुड्डू - 86.96 करोड़ रुपये से अधिक

ब्यावरा से भारतीय अमृत पार्टी के उम्मीदवार डॉ. सुशील कुमार प्रसाद - 15.17 करोड़ रुपये से अधिक

बदनावर से भाजपा उम्मीदवार राजवर्द्घन सिंह दत्तीगांव - 13.45 करोड़ रुपये से अधिक

ग्वालियर से पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की उम्मीदवार चाइना बेगम - तीन हजार रुपये

दिमनी से निर्दलीय उम्मीदवार सौरभ व्यास - सात हजार

मान्धाता से निर्दलीय उम्मीदवार शेख जाकिर शेख - 10 हजार रुपये

32 फीसद उम्मीदवारों को चुकानी हैं देनदारियां

32 फीसद (113) उम्मीदवारों को देनदारियां चुकानी हैं। इनमें सबसे ज्यादा ब्यावरा से भारतीय अमृत पार्टी के उम्मीदवार डॉ. सुशील कुमार प्रसाद को 2.25 करोड़, भांडेर से कांग्रेस उम्मीदवार फूलसिंह बरैया को 1.98 करोड़, बदनावर से भाजपा उम्मीदवार राजवर्द्घन सिंह दत्तीगांव को 1.80 करोड़ रुपये की देनदारियां चुकानी हैं।

सबसे ज्यादा कमाई करते हैं डॉ.चौधरी

सांची विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रभुराम चौ;घळर्-ऊि्‌झ।री सबसे ज्यादा कमाई करते हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 में उन्होंने कृषि भूमि और पेट्रोल पंप से 84 लाख रुपये से अ;घिळर्-ऊि्‌झ।क कमाए। दूसरे नंबर पर मान्धाता से कांग्रेस उम्मीदवार उत्तमपाल सिंह आते हैं।

उन्होंने भी खेती और पेट्रोल पंप से पिछले वित्तीय वर्ष में 30 लाख रुपये से ज्यादा कमाए। वहीं अधिक संपत्ति वाले छह उम्मीदवारों ने अपना आयकर विवरण साझा नहीं किया। इनमें छह करोड़ से अधिक संपत्ति का मालिक बदनावर से कांग्रेस उम्मीदवार कमल सिंह पटेल, मान्धाता से निर्दलीय जितेंद्र सिंह और दिमनी से बसपा के राजेंद्र सिंह कंषाना हैं।

शैक्षणिक योग्यता उम्मीदवारों की संख्या - शैक्षणिक योग्यता 195 - 5वीं से 8वीं के बीच 131 - स्नातक या उससे ज्यादा 21 - साक्षर 04 - निरक्षर 45 फीसद उम्मीदवार की उम्र 25 से 40 वर्ष के बीच 158- 25 से 40 वर्ष 160- 41 से 60 वर्ष 37- 61 से 80 वर्ष

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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