MP Assembly by elections भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में विधानसभा की 28 सीटों के लिए हो उपचुनाव की गहमागहमी के बीच कांग्रेस को एक और झटका लगा है। मतदान से महज दस दिन पहले दमोह से विधायक राहुल सिंह लोधी ने विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है।

बता दें कि राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक 22 विधायकों के कांग्रेस छोड़ने के कारण ही कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरी थी और अभी उन सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इस उपचुनाव का परिणाम सत्ता समीकरण के लिए निर्णायक होगा। ऐसे में कांग्रेस के विधायकों की संख्या कम होने से भाजपा रणनीतिक रूप से आगे दिख रही।

जारी रहेगा भाजपा का अभियान

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस से नाराज विधायकों को अपनी पार्टी में लाने का भाजपा का अभियान जारी रहेगा। भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी इस बारे में खुलकर तो कुछ नहीं कह रहे हैं, लेकिन वे कहते हैं कि भाजपा परिवार का सदस्य बनने वालों का स्वागत है। जो भी योग्य नेता पार्टी की रीति-नीति से सहमत हैं, उनके लिए भाजपा के द्वार खुले हैं।

इस्तीफा मंजूर, दमोह सीट रिक्त घोषित

विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने लोधी का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। इसके बाद सीट को रिक्त घोषित करने की अधिसूचना विधानसभा सचिवालय ने जारी कर दी है। अब इस सीट के लिए भी उपचुनाव कराने होंगे।

विधानसभा में मौजूदा दलीय स्थिति

कुल सीटें 230

भाजपा- 107

कांग्रेस- 87

बसपा- 2

सपा-1

निर्दलीय-4

रिक्त- 29

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लोधी के इस्तीफे के राजनीतिक मायने

उपचुनाव के बाद मप्र विधानसभा में प्रभावी संख्या 229 रहेगी। बहुमत के लिए 115 विधायकों की जरूरत होगी। भाजपा के 107 विधायक हैं। चार निर्दलीय, दो बसपा और एक समाजवादी पार्टी के विधायक भाजपा को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। इस प्रकार भाजपा के पास वर्तमान में 114 विधायक हैं। अत: उपचुनाव के बाद भाजपा को बहुमत के लिए सिर्फ एक विधायक की दरकार होगी। वरना दो विधायक चाहिए होते।

विधानसभा में कांग्रेस की मौजूदा सदस्य संख्या 87 रह गई है। पार्टी को सत्ता में वापसी के लिए सभी 28 सीटें जीतनी होंगी। तभी कांग्रेस 115 के जादुई आंकड़े को पा सकेगी।

संभावनाओं के समीकरण

- कांग्रेस यदि 21सीटें जीतती है और सभी निर्दलीय, बसपा और सपा का समर्थन मिलता है तो फिर सत्ता में वापसी हो सकती है।

- यदि उपचुनाव में दो या तीन सीटें बसपा जीत जाती है तो कांग्रेस का खेल बिगड़ जाएगा और उसे बसपा की बैसाखी की जरूरत पड़ेगी। वहीं, भाजपा उपचुनाव में जो भी सीट जीतेगी, उससे उसकी अन्य पर निर्भरता कम हो जाएगी।

भाजपा का विश्वास सौदेबाजी में

भाजपा का विश्वास सिर्फ सौदेबाजी और नोट में है। यही वजह है कि राजनीति को बिकाऊ बनाने में लगी है। जनता भाजपा की इस घृणित राजनीति का जवाब दे तथा जनादेश व अपने वोट के सम्मान के साथ प्रदेश को और कलंकित होने से बचाए।

-कमल नाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री

कमल नाथ आत्मचिंतन करें

शिवराज को गाली देने से काम नहीं चलेगा। कमल नाथ आत्मचिंतन करें कि कांग्रेस की यह दुर्गति क्यों हो रही है। जो जनता की सेवा नहीं कर पा रहे थे और जिनके मन में विकास के लिए तड़प है, वे कांग्रेस छोड़ रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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