भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता करेगी। सरकार ने नौ दिन से चली आ रही असमंजस की स्थिति पर विराम लगाते हुए मंगलवार को प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का फैसला कर लिया। देर रात नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों ने मध्य प्रदेश नगर पालिका विधि अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश का प्रारूप अनुमति के लिए राजभवन भेज दिया। बुधवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति मिलते ही इसे राजपत्र में अधिसूचित कर दिया जाएगा। नईदुनिया ने ही बताया था कि निकाय चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएंगे।

सरकार ने 14 मई को महापौर, नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता से कराने के लिए नगर पालिका विधि संशोधन अध्यादेश 2022 राजभवन भेजा था। विधायक अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही चुनाव कराने के पक्ष में थे लेकिन पार्टी के अधिकांश नेता चाहते थे कि निकाय चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही हों। एक राय नहीं बन पाने की वजह से 16 मई को अध्यादेश का मसौदा वापस ले लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैैठक के बाद मंत्रियों से मंगलवार को इस संबंध में चर्चा की और देर शाम संगठन के प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव से विचार-विमर्श किया। राव ने संगठन की राय से अवगत कराते हुए फैसला मुख्यमंत्री के विवेक पर छोड़ दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष चुनाव करवाने की मंशा से अधिकारियों को अवगत कराया। चूंकि, नगरीय विकास एवं आवास विभाग पहले ही प्रारूप तैयार कर चुका था, इसलिए बिना विलंब किए देर रात अध्यादेश का प्रारूप राजभवन भेज दिया गया। गौरतलब है कि कमल नाथ सरकार ने वर्ष 2019 में अधिनियम संशोधन कर महापौर, नगर पालिका एवं नगर परिषद के अध्यक्षों के सीधे निर्वाचन को खत्म कर दिया था। यानी इन पदों पर निर्वाचन पार्षदों द्वारा होने का नियम लागू हो गया था।

दिसंबर 2020 में शिवराज सरकार ने अधिनियम में किया था संशोधन

शिवराज सरकार ने दिसंबर 2020 में प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने के लिए अधिनियम में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन किया था। विधानसभा में विधेयक भी प्रस्तुत किया गया लेकिन यह पारित नहीं हो पाया। इसकी वजह से कमल नाथ सरकार द्वारा अधिनियम में किया गया परिवर्तन प्रभावी रहा। इस आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव भी करा चुका है।

भाजपा ने किया था अप्रत्यक्ष चुनाव का विरोध

विपक्ष में रहते हुए कमल नाथ सरकार द्वारा अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाने के निर्णय का भाजपा ने पुरजोर विरोध किया था। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, शिवराज सिंह चौहान, डा.नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह सहित अन्य नेताओं ने राज्यपाल से मिलकर अनुरोध किया था कि अप्रत्यक्ष प्रणाली के लिए लाए जा रहे अध्यादेश को मंजूरी न दें। सुप्रीम कोर्ट ने जब नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने के आदेश दिए तो एक बार फिर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाने की बात उठी। हालांकि, भाजपा विधायक इसके पक्ष में नहीं थे लेकिन संगठन ने स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराए जाएंगे।

Posted By: Ravindra Soni

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