भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश के ऐसे जनजातीय बहुल जिले जहां पर स्नातकोत्तर महाविद्यालय नहीं हैं, ऐसे क्षेत्रों में पीजी कालेज शुरू किए जाएंगे। यह निर्देश उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव ने सोमवार को उच्च शिक्षा विभाग के विभागीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए। उन्होंने उमरिया जिले में भी स्नातकोत्तर पढ़ाई के लिए महाविद्यालय प्रारंभ करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में हमें उच्च शिक्षा के लिए भविष्य की रणनीति बनाना आवश्यक है। जहां पर निर्माण कार्यों की आवश्यकता है, उनको चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करें। आवश्यकता के अनुरूप महाविद्यालयों का निर्माण कार्य हो। मंत्री ने महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए सेल का गठन करने के निर्देश दिए। इस सत्र 2022-23 में 10 नए व्यवसायिक विषय प्रारंभ किए गए। इसमें फैशन डिजाइनिंग, एग्री मार्केटिंग, कैटरिंग मैनेजमेंट, बेकरी एवं कंफेक्शनरी, हास्पिटलिटी एंड कैटरिंग मैनेजमेंट, प्लांट डिजीजेस एंड प्रोटेक्शन, मृदा विज्ञान एवं उर्वरक और सूचना प्रौद्योगिकी शामिल हैं। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव शैलेंद्र सिंह, आयुक्त कर्मवीर शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

जनभागीदारी समिति के अध्यक्षों के लिए होगी कार्यशाला

उच्‍च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि जनभागीदारी अध्यक्षों के लिए कार्यशाला आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्षों के साथ संबंधित कालेज के प्राचार्य को भी कार्यशाला में आमंत्रित करें। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में महाविद्यालयों के विकास के लिए आवश्यक अपेक्षाओं संबंध में प्रशिक्षण दिए जाए। बता दें कि मध्यप्रदेश के 462 शासकीय महाविद्यालय में से 314 शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी समिति अध्यक्षों का मनोनयन किया जा चुका है। 33 शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी समिति अस्तित्व में नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि इन महाविद्यालयों में भी शीघ्र जनभागीदारी समिति गठित की जाए और इसके लिए पंजीयन की कार्रवाई पूर्ण की जाए।

Posted By: Ravindra Soni

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