भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। MP News बुंदेलखंड विकास पैकेज में हुए 3860 करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर ईओडब्ल्यू ने शुक्रवार को प्राथमिकी जांच दर्ज कर ली है। यह प्राथमिकी आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) और वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई है। अब ईओडब्ल्यू की टीम पता करेगी कि इन दोनों विभागों को कितना रुपया आवंटित किया गया था और उसमें से इन विभागों ने कितना रुपया किस काम पर खर्च किया। फिलहाल यह प्राथमिकी जांच अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई है

दरअसल साल 2009 में केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने बुंदेलखंड विकास पैकेज के लिए करीब 7220 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इसमें मध्य प्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड के विकास के लिए करीब 3860 करोड़ रुपए मिले थे। इसमें प्रदेश के छह जिलों का विकास होना था। इनमें दमोह, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, दतिया और सागर शामिल थे। इस राशि से इन जिलों में मूलभूत समेत अन्य विकास कार्य किए जाने थे, लेकिन इसमें जमकर भ्रष्टाचार होने की शिकायतें केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार को की गई थीं।

शिकायतों में बताया गया था कि पांच टन पत्थर को ढोने के लिए जिन ट्रकों के नंबर दिए गए थे असल में वो स्कूटर और मोटरसायकिल के थे। इस पूरे मामले की आपराधिक जांच भाजपा के शासनकाल में रुकी रही थी। भाजपा सरकार मामले की आपराधिक जांच नहीं करवाते हुए विभागीय जांच करवा रही थी। लेकिन कांग्रेस ने सरकार बनाने के पहले इसे अपने वचन पत्र में शामिल किया था। इसी के बाद प्रदेश सरकार ने यह जांच ईओडब्ल्यू से कराने का निर्णय लिया है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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