भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के मीडिया समन्वयक रहे नरेंद्र सलूजा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। कमल नाथ पर सीधा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इंदौर में कीर्तनकारों ने कमल नाथ की 1984 के दंगों को लेकर जो भूमिका बताई, उससे यह मानता हूं कि उनमें कमल नाथ का हाथ था। जब तक उन्हें सजा नहीं मिलती, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे।

भारत जोड़ो यात्रा पर मध्य प्रदेश आए राहुल गांधी से नरेंद्र सलूजा ने अपील करते हुए कहा कि आप नफरत और हिंसा के विरुद्ध यात्रा निकाल रहे हैं और ऐसे व्यक्ति को साथ लेकर चल रहे हैं, जिसके विरुद्ध दंगा करवाने के आरोप हैं। कमल नाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाएं। उधर, प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया है कि नरेंद्र सलूजा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 13 नवंबर को ही निष्कासित किया जा चुका हैै। हालांकि पार्टी ने यह पत्र आज सार्वजनिक किया।

बता दें, आठ नवंबर को इंदौर में गुरु नानक जयंती पर हुए कार्यक्रम में सिख कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी ने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के स्वागत और सम्मान को लेकर विरोध जताया था। उन्होंने आयोजकों से कहा था कि शर्म करो, जिसने सिखों के घर बर्बाद कर दिए, जो 1984 के दोषी बताए जाते हैं, तुम उनका गुणगान कर रहे हो।

इस कार्यक्रम के बाद ही नरेंद्र सलूजा को पार्टी ने किनारे कर दिया। उनसे कमल नाथ से जुड़े सभी काम ले लिए गए थे। भारत जोड़ो यात्रा की मीडिया टीम में भी उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी।

उधर, नरेंद्र सलूजा ने कहा कि उस कार्यक्रम में 1984 दंगों का जो सच सामने आया, उसके बाद मेरा मन व्यथित हुआ। मैं ऐसे संगठन के साथ काम नहीं कर सकता हूं। मैं भाजपा में एक कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुआ हूं और पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे निभाऊंगा।

दूसरे दल के संपर्क में थे नरेंद्र सलूजा: कांग्रेस

उधर, प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग ने बयान जारी कर कहा कि तथ्यात्मक स्थिति यह है कि नरेंद्र सलूजा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। वे लगातार दूसरी पार्टी के संपर्क में थे। उनकी गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद उन पर यह कड़ी कार्रवाई की गई थी।

मीडिया टीम की कमान न मिलने से थे आहत

दरअसल, कमल नाथ ने मई में नई मीडिया टीम का गठन किया था और नरेंद्र सलूजा इसकी कमान न मिलने से नाराज थे। इंदौर के ही केके मिश्रा को मीडिया विभाग का अध्यक्ष बनाया गया। नरेंद्र सलूजा को उपाध्यक्ष बनाया गया और उनका नाम भी सातवें क्रम पर रखा था। इससे नाराजगी जताते हुए उन्होंने जूून में इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उन्होंने कुछ दिनों बाद इस्तीफा वापस ले लिया था, लेकिन अंदरूनी खींचतान चलती रही। गुरु नानक जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जब दंगों को लेकर कमल नाथ की भूमिका की बात उठी तो उन्होंने कोई बचाव नहीं किया और यही उनकी पार्टी से रवानगी की वजह बनी।

Posted By: Ravindra Soni

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