MP News: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश सरकार ने वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्ज देने की डिंडौरी से शुरुआत तो कर दी है, लेकिन वहां के वनवासियों को भूमि का विधिवत मालिकाना हक नहीं मिल सकेगा। इन परिवर्तित ग्रामों में किसी भी निवासी को भू-अधिकार पुस्तिका या ऐसा कोई अन्य अभिलेख या उसकी प्रति जारी नहीं की जाएगी, जिससे कि वे बैंक से ऋण ले सकें या उसका व्यावसायिक उपयोग कर सकें। इतना ही नहीं, इन ग्रामों के निवासी अपनी भूमि का विक्रय भी नहीं कर सकेंगे और न दान में दे सकेंगे।

ग्रामों में हो सकेंगे विकास कार्य

सरकार ने 827 वन ग्रामों में से डिंडौरी के 82 वन ग्रामों को पहले चरण में राजस्व ग्राम बना दिया है। इनमें समनापुर विकासखंड के 16, करंजिया के 25, डिंडौरी के आठ, अमरपुर के नौ, बजाग के पांच, शहपुरा के सात और विकासखंड मेहंदवानी के 12 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदला गया है। हालांकि, राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से इन ग्रामों में विकास कार्य किए जा सकेंगे और यहां के निवासी मूलभूत सुविधाओं से लाभान्वित हो सकेंगे।

अमित शाह ने की थी राजस्व ग्राम बनाने की घोषणा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मई 2022 में जंबूरी मैदान भोपाल में वनवासी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद कैबिनेट में 26 मई 2022 को 827 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने का निर्णय लिया था।

राजस्व भू-अभिलेख पटवारी हल्का में करेंगे शामिल

राजस्व ग्रामों के राजस्व भू-अभिलेख तैयार किए जाएंगे तथा इन्हें निकटतम पटवारी हल्के में शामिल किया जाएगा। राजस्व अभिलेखों में इन परिवर्तित ग्रामों के भू-धारकों को वनाधिकार धारक कहा जाएगा तथा इन भूमियों में नामांतरण सिर्फ परिवार के लोगों में ही किया जा सकेगा। प्रत्येक वनाधिकार धारक की भूमि का सीमांकन भी किया जाएगा। जब वन विभाग विधि अनुसार इन परिवर्तित ग्रामों का निर्वनीकरण करेगा, तब इन परिवर्तित ग्रामों में भूमि की खरीद-फरोख्त अन्य राजस्व ग्रामों की तरह हो सकेगी।

Posted By: Prashant Pandey

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