भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। मध्‍य प्रदेश सरकार अब ऐसी भूमि का कब्जा लेने की तैयारी कर रही है, जिस पर यदि कोई भू-स्वामी स्वयं या किसी अन्य के माध्यम से पांच साल तक जमीन पर खेती नहीं करता है और भू-राजस्व नहीं चुकाता है, यहां तक कि जमीन मालिक गांव भी छोड़ देता है। तहसीलदार ऐसे मामलों में जांच के बाद जमीन का कब्जा लेकर एक बार में एक साल के लिए भूमि स्वामी की ओर से उसे खेती के लिए पट्टे दे सकेंगे। पांच साल के बीच यदि जमीन मालिक भूमि के लिए दावा करता है तो बकाया भुगतान करने पर उसे कब्जा वापस दिलवा दिया जाएगा। यह प्रावधान सरकार ने भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक के जरिए किया है, जिसे राज्यपाल लालजी टंडन ने मंजूरी दे दी है।

शिवराज सरकार ने कर दिया था समाप्‍त

'नईदुनिया" ने 24 दिसंबर को 'खेती नहीं हुई तो जमीन सरकार की" शीर्षक से कमलनाथ सरकार द्वारा लाए जा रहे भू-राजस्व संहिता में संशोधन विधेयक का खुलासा किया था। दरअसल, शिवराज सरकार में हुए भू-राजस्व संहिता के संशोधन में धारा 176 'खाते का परित्याग" को समाप्त कर दिया था।

खेती की जमीन के खाली रहने, भू-राजस्व न मिलने और अतिक्रमण होने की कई शिकायतें सामने आई थीं। इसके मद्देनजर भू-राजस्व संहिता में संशोधन करके इस धारा को फिर से शामिल किया गया। इसके साथ ही आबादी क्षेत्र में भूमि स्वामी अधिकारों के निराकरण के लिए तहसीलदार को अधिकार दिए गए हैं। कोटवार, कृषि श्रमिक व शिल्पी से आबादी क्षेत्र में भवन का भू-राजस्व भी नहीं लिया जाएगा।

Posted By: Hemant Upadhyay

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