भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। MP News मध्य प्रदेश के लगभग 15 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को पांच फीसदी महंगाई भत्ता (डीए) और राहत (डीआर) मिलना अब मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। वित्त विभाग ने जिस तरह विभागों के बजट पर कैंची चलाई है, उससे इसकी संभावना और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि दो बार मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रस्ताव भेजने की फाइल भी बढ़ाई जा चुकी है लेकिन कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है।

250 करोड़ का बोझ उठाने में समर्थ नहीं

दरअसल, पांच प्रतिशत डीए और डीआर बढ़ाने पर लगभग 250 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार खजाने पर आएगा। केंद्रीय करों और सहायता अनुदान में कटौती के साथ राज्य के दूसरे खर्चों को देखते हुए मार्च के दूसरे पखवाड़े में प्रस्तुत होने वाले बजट में प्रावधान रखने की तैयारी चल रही है।

केंद्र बढ़ा चुका पांच फीसदी

केंद्र सरकार ने अक्टूबर में एकमुश्त पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता और राहत में बढ़ोतरी जुलाई 2019 से लागू की थी। वहीं, जुलाई 2019 में केंद्रीय करों से प्रदेश को मिलने वाली राशि में 2267 करोड़ रुपए की कटौती कर दी। इससे ही प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ाने की शुरुआत हो गई थी।

वित्त विभाग ने 20 प्रतिशत बजट रोककर वरिष्ठ अधिकारियों को बता दिया था कि इस बार बजट प्रबंधन के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। अक्टूबर 2019 में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 12 से बढ़कर 17 प्रतिशत हो गया तो कर्मचारियों और पेंशनर्स ने भी मांग उठाई। अतिवृष्टि और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई का हवाला देते हुए मामले को टाला गया। तब से ही प्रस्ताव चल रहा है।

केंद्र दे रहा लगातार झटके

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार आर्थिक मोर्चे पर एक के बाद झटके दे रही है। हाल ही में 14 हजार 233 करोड़ रुपए काटे गए हैं। आर्थिक मंदी की वजह से राज्य के करों की वसूली भी कम है। मार्च में यदि राज्य के करों की वसूली लक्ष्य के आसपास पहुंचती है तो फिर अप्रैल में डीए देने पर विचार किया जा सकता है।

एक फीसदी बढ़ाएं तो चाहिए 50 करोड़ सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों का डीए और पेंशनर्स का डीआर यदि एक फीसदी बढ़ाया जाता है तो खजाने पर इसका भार प्रतिमाह करीब 50 करोड़ रुपए आता है। पांच प्रतिशत के हिसाब से यह 250 करोड़ रुपए हर माह होगा। जुलाई से फरवरी तक के डीए/डीआर को जोड़ा जाए तो एरियर्स दो हजार करोड़ रुपए होता है।

छत्तीसगढ़ से लेनी पड़ेगी सहमति

सूत्रों का कहना है कि लगभग साढ़े चार लाख पेंशनर्स का डीआर बढ़ाने को लेकर कैबिनेट भले ही फैसला कर ले पर यह अमल में तभी आएगा, जब छत्तीसगढ़ सहमति देगी। दरअसल, राज्य बंटवारा कानून के मुताबिक ऐसे कोई भी कदम एक राज्य अकेला नहीं उठा सकता है जो दोनों राज्यों की वित्तीय व्यवस्था से जुड़ा हुआ हो। पेंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेशदत्त जोशी का कहना है कि सरकार ने तय किया था कि छत्तीसगढ़ की सहमति के प्रावधान को समाप्त किया जाएगा, इस पर अमल होना चाहिए।

कर्मचारी संगठन होने लगे लामबंद

डीए और डीआर में वृद्धि का फैसला लगातार टलने की वजह से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ने लगी है। विभिन्न् कर्मचारी संगठन इसको लेकर प्रदर्शन भी करने लगे हैं। पिछले दिनों सभी कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से विंध्याचल भन के सामने एकत्र होकर प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की है कि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत केंद्र के समान बढ़ाई जाए।

Posted By: Hemant Upadhyay