MP News: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के कर्मचारियों का गृह भाड़ा, यात्रा भत्ता, सचिवालयीन कार्य भत्ता सहित अन्य भत्ते बढ़ाने पर राज्य सरकार 10 साल बाद विचार करेगी। इसके लिए राज्य शासन ने सचिव वित्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बना दी है, जो सभी तथ्यों पर विचार करते हुए दो माह में अपना प्रतिवेदन सौंपेगी। बता दें कि प्रदेश में नियमित और संविदा मिलाकर आठ लाख 37 हजार कर्मचारी हैं, जिन्हें विभिन्न् भत्तों की पात्रता है।

इसके पहले 2012 में की थी वृद्धि

इससे पहले सरकार ने कर्मचारियों को दिए जाने वाले भत्तों की दरों में वर्ष 2012 में वृद्धि की थी। उस समय गृह भाड़ा भत्ता छठे वेतनमान के आधार पर दिया गया था, जो सात लाख की आबादी वाले क्षेत्र में वेतन का 10 प्रतिशत, तीन से पांच लाख की आबादी वाले क्षेत्र में सात प्रतिशत, 50 हजार से तीन लाख आबादी वाले क्षेत्र में पांच प्रतिशत और 50 हजार से कम आबादी वाले क्षेत्र में तीन प्रतिशत था। वहीं वाहन भत्ता 50 रुपये से बढ़ाकर दो सौ रुपये किया गया था। पेट्रोल सहित खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों के चलते कर्मचारी पिछले छह साल से भत्ते बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अब शासन ने इस पर ध्यान दिया है।

सातवां वेतनमान वर्ष 2016 में दिया गया

तीन सदस्यीय समिति सभी पक्षों को सुनने और उन पर मंथन करने के बाद अपनी अनुशंसा करेगी। पहली बार बनाई गई समिति कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी कहते हैं कि विभिन्न् भत्तों की दरों में वृद्धि के लिए पहली बार समिति बनाई गई है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। वे कहते हैं कि सरकार ने छठा वेतनमान कर्मचारियों को वर्ष 2006 में दिया था और भत्तों में वर्ष 2012 में वृद्धि की गई। ऐसे ही सातवां वेतनमान वर्ष 2016 में दिया गया है और अब जाकर भत्तों की दरों में वृद्धि पर चर्चा शुरू हुई है।

Posted By: Prashant Pandey

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