MP News : भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। प्रदेश में ढ़ाई लाख आउटसोर्स कर्मचारी हैं। इन्हें न्यूनतम आठ हजार और अधिकतम 12 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिल रहा है। ये इस वेतन से खुश नहीं है। लगातार वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक वेतन बढ़ा है और न ही बाकी की मांगों की भरपाई हो रही है। अब इन्होंने सदबुद्धि यज्ञ का सहारा लिया है। ये प्रदेश भर में सोमवार से यज्ञ कर रहे हैं। इनके संगठन प्रमुखों का का दावा है कि यज्ञ के माध्यम से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं ताकि अधिकारियों को पीड़ा समझ में आ सके। ये यज्ञ प्रदेश भर के जिलों, संभागों, विकासखंड स्तरों पर किए जा रहे हैं। यज्ञ का नेतृत्व प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत 30 हजार आउटसोर्स बिजली कर्मी कर रहे हैं।

नाराजगी की यह भी वजह

- इन्हें शासकीय सेवकों की मदद के लिए भर्ती किया था। यानी ये संबंधित विभागों में शासकीय सेवकों के साथ काम में हाथ बटाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पूरे काम की जिम्मेदारी ही इन पर आ गई है। जैसे बिजली कंपनियों में नियमित कर्मचारी गिने-चुने बचे हैं ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारियों को ही बड़ी से बड़ी व्यवस्था और जिम्मेदारी वाले काम देखने पड़ रहे हैं, जबकि संबंधित काम के लिए आउटसोर्स कर्मचारी जिम्मेदार ही नहीं है। इसलिए जब भी काम के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों से गलती होती है तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।

- इन्हें आए दिन काम से निकाल दिया जाता है। कुछ अधिकारी इनसे निजी काम अधिक ले रहे हैं। नहीं करने पर कोई भी आरोप लगाकर हटवा देते हैें।

- इन्हें काम पर रखने और निकालने की प्रक्रिया संबंधित विभागों द्वारा नहीं की जा रही है बल्कि इसके लिए आउटसोर्स कंपनियों को काम देख रखा है जिन्हें विभाग अलग से भुगतान करते हैं। ये आउटसोर्स कर्मचारी शासन को सुझाव दे चुके हैं कि इनके नाम पर जो भुगतान कंपनियों को किया जा रहा है उसका लाभ विभाग उन्हें वेतन के साथ में करें और आउटसोर्स कंपनियों को हटा दें।

- इन्हें नाममात्र के अवकाश की पात्रता होती है, जब चाहे तब दफ्तर बुला लिया जाता है। इनके कल्याण से जुड़ी कोई योजना नहीं है।

- इन्हें ठीक से प्रशिक्षित किए बिना काम लिया जा रहा है जिसकी वजह से ये ठीक से सेवा नहीं दे पा रहे हैं।

- शासकीय विभागों में जब भी प्रोत्साहन की बात आती है तो शासकीय व नियमित कर्मचारियों को लाभ मिल जाता है इन्हें कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है।

- तबादला, अनुकंपा निुयक्ति् का प्रविधान नहीं है। बोनस समय पर नहीं मिलता, करोड़ों रुपये रोक लिए हैं। महंगाई भत्ते की पात्रता नहीं है। ईपीएफ समय पर जमा नहीं किया जा रहा है।

Posted By: Lalit Katariya

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