MP Politics News : भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। लंबे समय तक भाजपा में रहने के बाद कांग्रेस में शामिल अपने दौर के सुपर सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा 'मध्य प्रदेश में भाजपा तीन खेमों में बंट गई, महाराज, नाराज और शिवराज' ट्वीट कर ट्रोल हो गए और उन पर ही तीखे तीर चले। हालांकि, यह सही है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से असंतोष गहरा गया है। भाजपा के प्रयास के बावजूद यह असंतोष थम नहीं रहा है। हालत यह है कि विस्तार के कई दिन बाद भी विभागों में बंटवारा नहीं हो सका। खास बात यह है पक्ष और विपक्ष केबयान इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमने लगे हैं। रायसेन जिले के विधायक पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, जबलपुर के पाटन क्षेत्र के विधायक अजय विश्नोई और इंदौर के रमेश मेंदोला जैसे वरिष्ठ विधायकों में मंत्री न बनाए जाने की नाराजगी अभी तक है। यही वजह है कि कांग्रेस इस मामले को लेकर शिवराज सरकार को घेरने में जुट गई है।

ध्यान रहे कि जिस दिन मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था, उस दिन पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी असंतोष जाहिर किया था। जातीय समीकरण बिगड़ने और अपने समर्थकों की अनदेखी की बात उमा ने उठाई थी। सोमवार को उज्जैन में दर्शन करने पहुंची उमा ने सिंधिया समर्थकों पर निशाना साधते हुए यहां तक कह दिया 'जो पार्टी में आ गए हैं उन्हें यही कहूंगी कि किसी विभाग को मलाईदार न समझें। ज्योतिरादित्य के कारण आपकी नैया पार लग गई। हमारे यहां सब सेवक होते हैं, यहां मलाई नहीं होती।' इसके बाद उमा की बात को आगे बढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया।

मंत्री बनाए गए वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने उमा भारती के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा के मंत्री मलाईदार पदों के फेर में नहीं रहते। उन्होंने कहा कि मैंने कभी मलाईदार विभाग नहीं देखे हैं, मुझे नहीं लगता कि विभागों में मलाई होती है। वहीं, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस छल और कपट की राजनीति करती है। सिंधिया समर्थक शिवराज सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट ने कांग्रेस पर प्रहार किया और कहा कि कांग्रेस में व्यक्ति चुनाव लड़ता है, जबकि भाजपा में संगठन चुनाव लड़ता है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के विभागों का बंटवारा करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। वह समय आने पर बंटवारा कर देंगे।

वर्चस्व की लड़ाई शुरू

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद से वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि सिंधिया का खेमा अपने अस्तित्व को लेकर सजग है। दूसरी तरफ सिंधिया के आने से नाराजगी भी बढ़ी है। लोकसभा में सिंधिया को चुनाव हराने वाले भाजपा सांसद केपी यादव को पार्टी ने गत दिवस वर्चुअल रैली को संबोधित करने के लिए बुलाया था, लेकिन मौजूद रहकर भी उन्होंने सक्रिय भागीदारी नहीं दिखाई। मंत्री न बन पाने वाले विधायक शैलेंद्र जैन और यशपाल सिंह जैसे लोग अपने लोगों को जरूर समझाबुझा रहे हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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