भोपाल(राज्य ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा को कांग्रेस एक बार फिर राज्यसभा में भेजेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने शनिवार को मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि तन्खा का नाम राज्यसभा चुनाव के लिए तय कर दिया गया है। गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव 2016 में बहुमत न होते हुए भी तन्खा चुनाव लड़कर राज्यसभा में पहुंचे थे।

इधर भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव की तस्वीर जल्द ही साफ होने की उम्मीद है। भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व दिल्ली से नाम तय करेगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक मध्य प्रदेश से रिक्त हो रही भाजपा की दो सीटों में एक प्रदेश को मिलने की उम्मीद है। वहीं, दूसरी सीट राष्ट्रीय नेतृत्व के कोटे से भरी जाएगी।

मध्य प्रदेश से फिलहाल हिंदूवादी नेता जयभान सिंह पवैया का नाम दावेदारी में सबसे ऊपर है। पवैया को पार्टी ने अपने प्रदेश कोर ग्रुप में भी जगह देकर उनका कद बढ़ाने की कोशिश की है। वहीं ग्वालियर-चंबल से भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य का नाम भी दावेदारों में शामिल है।

अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। पार्टी नेताओं का मानना है कि रविवार या सोमवार को राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची दिल्ली से जारी हो सकती है। गौरतलब है कि 31 मई तक नामांकन पत्र जमा करने की आखिरी तारीख है। मध्य प्रदेश से भाजपा से एमजे अकबर और सम्पतिया उइके का कार्यकाल अगले महीने खत्म हो रहा है। उइके को उपचुनाव के जरिये राज्यसभा में भेजा गया था। तब केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे के निधन से राज्यसभा की सीट रिक्त हुई थी।

तन्खा को मिला संयम का तोहफा

कांग्रेस की ओर से विवेक तन्खा राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वे रविवार को भोपाल में मप्र कांग्रेस द्वारा आयोजित वकीलों की बैठक में शामिल होंगे। गौरतलब है कि तन्खा कांग्रेस के उन असंतुष्ट नेताओं में शामिल रहे हैं, जो ग्रुप 23 के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती देते रहे हैं। लेकिन तन्खा ने कभी भी पार्टी नेतृत्व के प्रति कभी भी तल्खी नहीं दिखाई ,जिसका उन्हें फायदा मिला। कांग्रेस के बदले हुए समीकरणों में भी तन्खा जैसे कानूनविद् की पार्टी को जरूरत थी।

मनमोहन सिंह सरकार में कानून मंत्री रहे कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी, ऐसे हालात में कांग्रेस तन्खा को नहीं छोड़ सकती थी। चाहे कानूनी विवाद हों या प्रियंका गांधी वाड्रा के निज सचिव की गिरफ्तारी का मामला हो, सुप्रीम कोर्ट में तन्खा ने ही कांग्रेस का मोर्चा संभाला है। तन्खा कश्मीरी पंडित भी हैं, जाहिर है कांग्रेस कश्मीर में भी तन्खा का उपयोग करेगी। यही वजह है कि तन्खा को उनके धैर्य का प्रतिफल मिला।

Posted By: Ravindra Soni

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