ललित नारायण कटारिया, भोपाल। जबलपुर से 24 किमी की दूरी पर एक छोटा गांव है उदयपुर। यह गांव मंडला जिले में आता है। गांव पिछले चार सालों से खेलों के कारण चर्चा में आया है। बिना सुविधा और संसाधन के तलवारबाजी जैसे खेल में यहां की प्रतिभाएं गजब का प्रदर्शन कर रही हैं। राजधानी में आयोजित राज्यस्तरीय शालेय प्रतियोगिता में इस टीम ने 30 से अधिक पदक जीतकर सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। तलवारबाजी को अमूमन महंगा और पैसे वालों का खेल माना जाता था,लेकिन छोटे से गांव के एक फुटबाल प्रशिक्षक ने अपनी मेहनत से इस धारणा को बदलकर रख डाला है। प्रशिक्षक संदीप वर्मा ने नवदुनिया को बताई अपनी सफलता की कहानी।

प्रश्न : आप फुटबाल कोच हैं और तलवारबाजी के खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं, यह विचार कैसे आया ?

उत्तर : हमारे स्कूल में फुटबाल के लायक मैदान नहीं था, लेकिन मुझे खिलाड़ी तैयार करना था, मैंने तलवारबाजी के बारे में सुना था और इंटरनेट के माध्यम से इस खेल को जानने की कोशिश की, मुझे लगा कि यदि इसमें मेहनत की जाए तो प्रतिभाएं तैयार की जा सकती है। इसलिए मैंने इस खेल का चुना।

प्रश्न : तलवारबाजी हमारा परंरागत खेल नहीं है, यह बड़े शहरों तक ही सीमित है, बच्चों को प्रशिक्षित करने में परेशानी तो आई होगी।

उत्तर : मैं खुद भी इस खेल से अनजान था, बच्चों को इसके बारे में शुरुआत में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन नया खेल होने के कारण छात्रों में कुछ नया करना चाहते थे, इसलिए बाद में सभी को यह खेल पसंद आने लगा।

प्रश्न : तलवारबाजी के खेल उपकरण बहुत महंगे मिलते है, बिना उपकरण के कैसे आपने इन्हें तैयार किया।

उत्तर : मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि मैं वो खेल सिखा रहूं हूं, जिसके उपकरण से मैं खुद भी अनजान था, मैंने वीडियो में तलवार देखी थी। उसी के बराबर की लकड़ी का जुगाड़ किया और अभ्यास शुरू कर दिया। देखते ही देखते सभी बच्चों को यह पसंद आने लगा था।

प्रश्न : तलवारबाजी क्या सिर्फ उदयपुर गांव तक ही सीमित था या आसपास के गांव भी इसमें शामिल है।

उत्तर : उदयपुर के अलावा आठ दस किमी क्षेत्र में नौ दस गांव के बच्चें भी अभ्यास के लिए आते है, एक प्रकार से तलवारबाजी के लिए पूरे क्षेत्र में माहौल बनता जा रहा है। ग्रामीण भी सहयोग कर रहे हंै।

प्रश्न : इस खेल के विकास के लिए क्या आवश्यता है।

उत्तर : इस पूरे क्षेत्र में 100 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास कर रहे है, यदि उन्हें प्रचलित इलेक्ट्रानिक मैट और आधुनिक तलवार मिल जाए तो गांवं अकादमी बन सकता है। अभी हम लकड़ी को ही तलवार बनाकर अभ्यास कर रहे हैं।

प्रश्न : राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में मंडला का कैसा प्रदर्शन है, इसके पहले भी कभी भाग लिया था

उत्तर : भोपाल में चल रही प्रतियोगिता में हमारे खिलाड़ी उम्मीद केमुताबिक प्रदर्शन कर रहे हैं। अभी तक 50 से अधिक पदक खिलाड़ी पदक जीत चुके हंै। 2018 में भी हमारी 72 सदस्यीय टीम ने भाग लिया था और 59 पदक जीते थे। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता को पांच हजार, रजत विजेता को चार व कांस्य पदक को तीन हजार का पुरस्कार मिलता है, इस राशि से हमारे खिलाड़ियों बहुत लाभ मिला था और नए खिलाड़ी भी सामने आते है।

Posted By: Lalit Katariya

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