धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी ने आरोप लगाया कि जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) कांग्रेस का गोदीपुत्र है, इसलिए वह आदिवासी समाज को गुमराह कर रहा है। आदिवासी वर्ग का सही कल्याण भाजपा ने किया लेकिन जयस में यह साहस नहीं कि वह कांग्रेस से सवाल कर सके कि उसने सत्तर साल के शासन में आदिवासियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए कुछ क्यों नहीं किया?

जयस के संरक्षक डा. हीरा अलावा को भी सोलंकी ने चुनौती दी कि अगर उनका संगठन समाज के हित में बना था तो वे कांग्रेस की गोद में जाकर क्यों बैठ गए? अलावा में साहस है तो वे कांग्रेस से हटकर जयस के बैनर पर चुनाव मैदान में उतरें, सब मालूम पड़ जाएगा कि कौन कितने पानी में है। सोलंकी से कई अन्य मसलों पर नईदुनिया ने बातचीत की।

प्रश्न - क्या जयस ने आदिवासी वर्ग की भाजपा से दूरी बनाई है।

सोलंकी - जयस का जब गठन हुआ था तो उसका उद्देश्य सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करना था लेकिन कुछ लोगों ने इसका राजनीतिक फायदा उठाया और जयस के जरिए अपनी राजनीति चमका ली। डा हीरा अलावा भी उनमें से ही एक हैं। ऐसे लोगों का मकसद सिर्फ अपनी रोटी सेकना है। दरअसल, कांग्रेस नेता कमल नाथ ने सही कहा था कि जयस में कांग्रेस का ही डीएनए है। यह बात सही है। जयस का असली बाप कांग्रेस ही है। यही वजह है कि जयस ने कांग्रेस के 70 साल के शासन पर कभी सवाल नहीं उठाया। कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा लेकिन जयस इस मुद्दे पर मौन रहता है। जयस ने आदिवासियों के भोलेपन का लाभ उठाया और जिस भाजपा ने आदिवासी वर्ग का उत्थान किया, उसके खिलाफ जहर घोलने का काम किया लेकिन अब हमारा समाज अब सारी हकीकत समझ गया है आने वाले चुनाव में भाजपा आदिवासी वर्ग की सभी सीटें जीतेगी।

प्रश्न - 2018 के विधानसभा चुनाव में हार का कारण जयस था।

सोलंकी - नहीं, तब परिस्थिति अलग थी। कांग्रेस ने भ्रम फैलाया, आदिवासी वर्ग को झूठे सपने दिखाए और वोट पा लिया। 15 महीने की सरकार में सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों का हुआ। कमल नाथ सरकार ने आदिवासी वर्ग की सभी योजनाएं बंद की दी। कई किसान कांग्रेस की ऋणमाफी योजना का शिकार बने और डिफाल्टर हो गए। हमारे कन्यादान सहित सहरिया-भारिया विशिष्ट पिछड़ी जनजाति के आदिवासियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद कर दी गई। ऐसे क्रियाकलापों ने कांग्रेस के फर्जी आदिवासी प्रेम को सबके सामने ला दिया।

प्रश्न- क्या 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को आदिवासी वर्ग का साथ मिलेगा।

सोलंकी - निश्चत तौर पर 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सारी आदिवासी सीटें जीतेगी। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आदिवासी वर्ग के लिए जो काम किए हैं, वह ऐतिहासिक हैं। मोदी जी की ही सोच थी कि देश के राष्ट्रपति पद पर हमारे आदिवासी समाज की द्रौपदी मुर्मु पहुंची। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला लेने का साहस सिर्फ मोदी जी में है। मध्य प्रदेश हो या छत्तीसगढ़, दोनों राज्यों में राज्यपाल के पद पर आदिवासी समाज के लोग हैं। क्या कांग्रेस 70 साल में कभी यह नहीं सोच पाई कि आदिवासी भी हमारे समाज का अंग है, उसे भी मुख्यधारा में लाना चाहिए।

Posted By: Prashant Pandey

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