भोपाल। शहर के 60 जायरीनों के जेद्दा में फंसे होने की खबर प्रकाशित होने के बाद अब सरकार सक्रिय हुई है। भारतीय दूतावास ने कुछ लोगों को जेद्दा की एक होटल में ठहराया है। उन्हें तीन दिन में भारत वापस भेजने का आश्वासन दिया गया है। इधर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आरिफ अकील का दावा है कि 16 लोग वापस आ गए हैं। वहीं, भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद शुक्रवार रात जेद्दा के लिए रवाना हो गए हैं। उमराह के बाद शनिवार को वे जेद्दा में फंसे लोगों से मिलने जाएंगे।

इधर फंसे हुए लोगों के परिजन का भोपाल में बुरा हाल है। करोंद स्थित सईद कॉलोनी निवासी नुरून्निसा उमराह के लिए गई हैं। 11 जून को वे वापस भोपाल आने वाली थीं। उनकी दोनों बेटियां काहिना हाशमी देवास से और शबनूर छतरपुर से मिलने भोपाल आईं तो पता चला कि मां धोखाधड़ी का शिकार हो गईं और सऊदी अरब में फंस गई हैं। तब से वे बार-बार अपनी मां की खैरियत फोन पर ले रही हैं। वहीं कबाड़खाना निवासी सैयद साबिर अली अपने परिवार को लेकर बेहद चिंतित हैं। उनकी दोनों बेटियां खुशनुमा और रहनुमा अपने बड़े पापा और बड़ी मम्मी के साथ गई हुई हैं। वे बार-बार सोशल मीडिया पर उनकी फोटो मंगा कर खैरियत ले रहे हैं।

जेद्दा में फंसे लोगों के परिवार वाले फिलहाल पुलिस में एफआईआर कराने से भी हिचक रहे हैं। पीड़ितों के परिवार के सदस्यों के मुताबिक, अभी जेद्दा में फंसे परिवार के लोगों ने ट्रेवल एजेंट के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने से इंकार किया है। भोपाल में रह रहे परिजन फिलहाल अपने लोगों के वापस लौटने का इंतजार कर रहे हैं, इसके बाद वे पुलिस में शिकायत करेंगे।

भारतीय दूतावास ने तीन दिन में वापस भेजने का वादा किया

जेद्दा में फंसे पीड़ितों में से एक मोइनुद्दीन ने बताया कि सऊदी अरब के भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने कहा है कि पीड़ितों को दो-तीन दिन में वापस भारत भेजने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास ने पीड़ितों को एक होटल जोहरात-अल-मिसफला में रुकवाया है, हालांकि खाने-पीने का खर्च पीड़ितों को खुद वहन करना पड़ रहा है।

15 लोगों का समूह 16 जून को आएगा

जेद्दा में फंसे पीड़ित लोगों में से 15 लोगों का समूह 16 जून को भोपाल पहुंचेगा। इन्हें जेद्दा स्थित भोपाल रुबात में ठहराया गया है। भोपाल रुबात में खाना-पीना और ठहरना निःशुल्क होता है।

ऐसे करते हैं ट्रेवल एजेंट फ्रॉड

मोती मस्जिद स्थित एक ट्रेवल एजेंसी के संचालक शमीम खान के मुताबिक, उमराह के लिए जाने वाले लोग जागरूकता नहीं होने की वजह से सस्ते पैकेज के झांसे में आ जाते हैं। मुंबई-दिल्ली जैसे बड़े शहरों की ट्रेवल एजेंसियां भोपाल जैसे शहरों में अपने एजेंट बनाती हैं। ये एजेंट धर्मावलंबियों को विश्वास में लेकर पैकेज के लिए पैसा लेते हैं। यही एजेंट उमराह के लिए जाने वाले लोगों से पैसा कैश लेकर टिकट करवाते हैं। सारा पैसा इकट्ठा कर मुंबई-दिल्ली की ट्रेवल एजेंसी अपना कमीशन काटकर दे देते हैं। कई एजेंट पैसा हड़पने के लिए उनके द्वारा कराया गया रिटर्न टिकट कैंसिल करा देते हैं, इससे टिकट कैंसिल करने का पैसा भी एजेंट को ही मिल जाता है। ये एजेंट कहीं रजिस्टर्ड नहीं होते हैं इसलिए इनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।

हज या उमराह करने जाने वाले इन बातों का ध्यान रखें

- पेमेंट चेक से करें।

- जिसे आप पैसा दे रहे हो, वह ट्रेवल एजेंट(रहबर) साथ में जाए।

- सस्ते पैकेज के झांसे में न आएं।

16 लोग आ गए हैं : मंत्री

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आरिफ अकील का दावा है कि जो लोग जेद्दा में फंसे थे, उनमें से 16 लोग वापस आ गए हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया। आरिफ अकील ने कहा कि जल्द ही सभी लोग वापस आ जाएंगे।

विधायक आरिफ मसूद भी उमराह पर, पीड़ितों से मिलेंगे

भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद भी उमराह पर सऊदी अरब गए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह आरिफ मसूद पीड़ित लोगों से मिलने जाएंगे।

25 दिन पहले भी ऐसा हुआ था

कोहेफिजा टीआई अमरेश बोहरे ने दावा किया है कि 25 दिन पहले इसी तरह का एक मामला सामने आया था। एजेंट को बुलाकर समझाया तो उसने वहां फंसे हुए लोगों को वापस बुलाने की व्यवस्था कर दी थी। इस नए मामले की पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं है। एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि इस मामले की किसी ने शिकायत नहीं की है।

10 फीसदी ट्रेवल एजेंसियां ही लेती हैं आरटीओ से प्रमाण पत्र

देश-दुनिया के पर्यटन स्थलों पर लोगों को यात्रा कराने वाली ट्रेवल्स एजेंसियों को संबंधित आरटीओ से अभिकर्ता (एजेंट) प्रमाण पत्र लेना होता है। यदि कोई ट्रेवल्स एजेंसी यात्रियों को तय शर्तों के मुताबिक, यात्रा नहीं कराती या बीच में यात्रियों को छोड़ देती हैं तो शिकायत होने पर आरटीओ को अभिकर्ता प्रमाण पत्र निरस्त करने का अधिकार है। वहीं यात्रियों को सुविधानुसार पूरी यात्रा नहीं कराने पर पुलिस संबंधित ट्रेवल्स एजेंसी के मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करती है।

भोपाल में 200 से ज्यादा ट्रेवल एजेंसियां चल रही हैं, लेकिन आरटीओ से करीब 30 ट्रेवल्स एजेंसियों ने ही अभिकर्ता प्रमाण पत्र लिए हैं। इसका शुल्क 10 हजार रुपए होता है। प्रमाण पत्र तीन साल के लिए वैध रहता है। समयावधि पूरी होने पर पांच हजार रुपए देकर अभिकर्ता प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराना होता है। ज्यादातर ट्रेवल एजेंसियां बिना अभिकर्ता प्रमाण पत्र के ही संचालित हो रही हैं। अभी तक किसी भी ट्रेवल एजेंसी के अभिकर्ता प्रमाण पत्र निरस्त नहीं हुए हैं।