- मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन में तहरी मुशायरा का आयोजन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

उर्दू अकादमी की ओर से गुरुवार को मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन में तहरी मुशायरा आयोजित किया गया। उर्दू महफिल एक खुला मंच है जिसमें अपनी सृजनात्मकता को कोई भी प्रस्तुत कर सकता है। दरअसल तरही मुशायरे में एक तरह दी जाती है जिस पर कलाम लिख कर तैयार कर शिरकत की जाती है। इस बार की तरह गालिब के शेर से ली गई थी 'अगर और जीते रहते यही इंतेजार होता' इस तरह पर जिन शोआरा ने अश्आर सुनाए। इस मौके पर अजीम असर ने सुनाया 'किसी दस्ते बा सफा में अगर इकतिदार होता, रा मुल्क नफरतों का न कभी शिकार होता'। इस क्रम में डॉ. मो. आजम ने 'यह तो है जमीन-ए-गालिब, तेरी कोशिशे थीं बेजा, कोई कैसे शेर आजम तिरा शाहकार होता' और मुबारक खान शाहीन ने 'तेरे अबरूओं का जादू जो जिगर के पार होता, अगर और जीते रहते यही इंतेजार होता' सुनाया। वहीं इस क्रम में शोएब अली खान ने 'तेरी देख कर तजल्ली, जो कलीम गश न खाते सरे तूर यह करिश्मा, यूंही बार-बार होता' के जरिए अपनी बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता लेखक जिया फारूकी ने और संचालन डॉ. मो. आजम ने किया। इस अवसर पर अकादमी के सचिव डॉ. हिसाम उद्दीन फारूकी सहित अन्य श्रोता उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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