प्रत्येक मनुष्य के जीने का ढंग और नजरिया अलग-अलग होता है। हमें अंदर से प्रसन्न रहना चाहिए। मनुष्य का अंतिम उद्देश्य किए गए कार्य द्वारा आत्मिक खुशी और संतुष्टि प्राप्त करना ही होता है। यदि ये न मिले तो मेरा मानना है कि हमारे द्वारा अर्जित सारी उपलब्धियां व्यर्थ हैं। मैं किसी से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं रखती, स्वयं से भी नहीं। महत्वाकांक्षाओं की अंधी दौड़ के पीछे भागकर हम न केवल अपना अहित करते हैं, बल्कि तनावग्रस्त हो जाने के कारण अपने आपको छोटी-छोटी खुशियों से वंचित कर देते हैं। मेरी सबसे करीबी मित्र मैं स्वयं हूं। खुद से बातें करना मुझे बड़े से बड़े तनाव से बचाता है। जीवन का एक-एक पल बहुत कीमती होता है। हर पल अगले पल ही अतीत में बदल जाता है और इतिहास बन जाता है। खुशी और प्रसन्नता सबसे बड़े टॉनिक हैं। जिसने इसे पीने का ढंग सीख लिया, उसने जीवन जीना भी सीख लिया।

-शशि बंसल गोयल, लेखिका

Posted By: Nai Dunia News Network

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