Navdunia Anjali Rai Column: अंजली राय, भोपाल। इस बार कोरोना ने सभी का बेड़ा पार कर दिया। विद्यार्थी हो या स्कूल, हर किसी का सपना पूरा हो गया। दरअसल, इस बार मध्यप्रदेश दसवीं बोर्ड का परिणाम सौ फीसद रहा, जबकि पिछले पांच साल से दसवीं का रिजल्ट 70 फीसद तक भी नहीं पहुंच रहा था। इस बार कुछ स्कूल के सभी बच्चे प्रथम श्रेणी से पास हुए तो कुछ ने नए रिकॉर्ड भी बना लिए। इस साल दसवीं में साढ़े तीन लाख बच्‍चे प्रथम श्रेणी, पौने चार लाख द्वितीय तो डेढ़ लाख तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने भी इस बार दसवीं का परिणाम बेहतर करने के लिए प्राचार्यों को लक्ष्य तय करने के लिए कहा था। अगर परिणाम अच्छा नहीं आता तो शिक्षकों को परीक्षा देनी होती, लेकिन कोरोना ने बचा लिया। पिछले दो साल में परीक्षा परिणाम बिगड़ने पर शिक्षकों की परीक्षा लेकर फेल होने पर उन्हें सेवानिवृत्ति भी दी गई।

इस बार भी निराश हो गई आरती की मां

आरती की मां का सपना था कि उसकी बेटी राजधानी के किसी बड़े स्कूल में पढ़ाई करे, लेकिन कोरोना काल में पिता की नौकरी चले जाने के बाद उसका सपना चकनाचूर हो गया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम ने थोड़ी आस जगाई, लेकिन वह भी साकार नहीं हो सका। दरअसल, कुछ कारणों से आरती आरटीई के तहत होने वाली लॉटरी प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हो पाई, इस कारण उसका एडमिशन भी नहीं हो सका। बता दें कि पिछले साल आरटीई के तहत प्रवेश नहीं हुए थे। इस बार एडमिशन प्रक्रिया के तहत निजी स्कूलों में दो लाख 84 हजार सीटें लॉक की गईं, लेकिन एक लाख 72 हजार आवेदन ही सत्यापित हुए और एक लाख 40 हजार बच्‍चों को सीटें आवंटित हुईं। इस प्रक्रिया में आरती की मां के सपनों पर पानी फिर गया। आरती ही नहीं, उस जैसे कई बच्‍चे बड़े निजी स्कूलों में पढ़ाई करने से पीछे रह गए।

एक तीर से दो निशाने

राजधानी के एक विश्वविद्यालय के कुलपति इस माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन कुर्सी का मोह छूट नहीं रहा है। दोबारा पद पर आसीन हो जाएं, इसलिए तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं। अभी हाल ही उन्होंने अपना एक आशियाना बनवाया है। उसके उद्घाटन में उन्होंने मंत्री, सांसद और विधायकों को भी बुलाया और खूब आवभगत की। इस दौरान वे पूजा-पाठ के साथ-साथ शासन का गुणगान कर एक तीर से दो निशाने साधने में लगे रहे। इधर, राजभवन में भी कुलपति चयन के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है। यही नहीं, यहां पांच नामों का एक लिफाफा भी तैयार है। अब चर्चा तो यह भी है कि इन पांच नामों में महोदय का नाम नहीं है, लेकिन फिर भी ये पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब डर इस बात का है कि कहीं महोदय गुणगान में ही लीन न रहें और कुर्सी कोई और खींच ले जाए।

अधिकारियों को जिम्मेदारी का झुनझुना

स्कूल शिक्षा विभाग ने जैसे-तैसे तबादला नीति तो जारी कर दी, लेकिन शिक्षकों को यह खानापूर्ति का कार्यक्रम ही लग रहा है। दरअसल इसमें कई प्रकार की गफलत हैं। तबादले के लिए अनुमोदन करने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी और प्रभारी मंत्री को दी गई है, लेकिन पूरा पॉवर विभागीय मंत्री के पास ही है। ऐसे में यह जिम्मेदारी का झुनझुना ही लग रहा है। यही नहीं, शिक्षकों को संस्था प्रमुख और संकुल प्राचार्य से भी अनुमोदन कराना है। अब संकुल प्राचार्य अलग भाव खा रहे हैं। कोई शिक्षक अगर इतना कर भी ले तो उसे यह नहीं पता चल पा रहा है कि किस स्कूल में किस विषय के लिए पद खाली हैं, क्योंकि फिलहाल शिक्षा पोर्टल पर रिक्त पदों की संख्या भी प्रदर्शित नहीं हो पाई है। अभी इतना ही हो रहा है कि डीईओ कार्यालय में आवेदनों की भरमार लग रही है।

Posted By: Ravindra Soni

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags