Naidunia Manoj Tiwari Column: मनोज तिवारी, भोपाल। हाल ही में मध्य प्रदेश आईं अखिल भारतीय सेवा की एक महिला अधिकारी के खौफ ने कर्मचारियों को परेशान कर रखा है। कामकाज में तेजतर्रार कही जाने वाली इस अधिकारी ने फाइलों में अंदर तक उतरना और कांट-छांट करना शुरू कर दिया, तो कर्मचारियों के कामकाज पर नजर भी रख रही हैं। इससे कर्मचारी पहले ही नाराज थे कि मैडम ने तीसरी नजर का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है। मामला प्रदेश की आबोहवा से जुड़े विभाग का है। मैडम को कर्मचारियों के पास बाहरी व्यक्तियों का आना-जाना रास नहीं आ रहा है और अब वे हर कर्मचारी पर खुद नजर रखना चाहती हैं। इसलिए सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था में लगी हैं। इसके लिए संबंधित विभाग को लिखा गया है। वे चाहती हैं कि उनके कक्ष से हर कर्मचारी की टेबल पर नजर रखी जा सके। कर्मचारियों को जबसे ये बात पता चली है, तो उनकी नाराजगी बढ़ गई है।

रास नहीं आ रही सस्ती सवारी

जिले में राजा जैसा जीवन जीने वाले अधिकारियों के सपने भी बड़े होते हैं और वह अधिकारी किसी जिले में कलेक्टर रहा हो, तो बात ही अलग है। ऐसे ही एक अधिकारी इन दिनों परेशान हैं और परेशानी की वजह है उन्हें आवंटित पुरानी और सस्ती गाड़ी। मैदानी पदस्थापना से हटाकर मंत्रालय में पदस्थ किए गए इस अधिकारी को संबंधित विभाग के अधिकारियों ने स्विफ्ट गाड़ी थमा दी है और ये अधिकारी अभी तक स्कार्पियो सहित अन्य लग्जरी गाड़ियों में सफर करते रहे हैं। लिहाजा स्विफ्ट तो पसंद आने से रही। फिर वह पुरानी भी हो चुकी है। इस कारण महोदय अपने ही विभाग के अधिकारियों से नाराज चल रहे हैं। वे कार्यालय से घर आने-जाने के लिए सियाज गाड़ी चाहते हैं और कई बार वाहन आवंटन अधिकारी से भी कह चुके हैं, पर नियम अनुसार उन्हें नहीं दी जा सकती है। यही स्थिति टकराव का कारण बन गई है।

अभिशप्त हुआ चौथा फ्लोर

जिस भवन से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में विकास की गंगा बहती है। उसका चौथा फ्लोर (चौथी मंजिल) अभिशप्त हो गया है। अभिशाप भी ऐसा कि कोई अधिकारी इस फ्लोर पर बैठने को तैयार नहीं है। फिर भी किसी को बैठा दिया जाए, तो उसे अनहोनी का डर सताता रहता है। राजधानी में ऐसे कई भवन हैं, जिनसे कई अंधविश्वास जुड़े हैं। यह भवन भी इस सूची में शामिल हो रहा है। लोगों ने ध्यान दिया है कि भवन के चौथे फ्लोर पर एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जो वहां बैठने वाले अधिकारी के हित में नहीं हैं। चाहे वह कोचिंग संस्था, महिला और रिश्वत कांड से जुड़ी घटनाएं हों। हर मामले में इस फ्लोर पर बैठने वाले अधिकारी ही फंसे हैं। इसलिए चौथे फ्लोर पर बैठने की बात आते ही अधिकारियों के कान खड़े हो जाते हैं और वे इससे बचने की कोशिश करते हैं।

अब क्यों आई सौ पेज की सफाई

महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के मामले में फंसे एक अधिकारी ने अपने विभाग को सौ पेज की सफाई दी है, जो चर्चा का विषय बन गई है। साहब पहले तो कहते रहे कि उन्होंने प्रताड़ित नहीं किया, लेकिन यही बात लिखित में समझाने में उन्हें सौ पेज भरने पड़े। वह भी मामले की जांच पूरी होने के बाद। बताया जाता है कि मामले की जांच के लिए गठित दो महिला अधिकारियों की समिति ने शिकायत पर मुहर लगा दी है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश भी की है। हालांकि समिति को रिपोर्ट सौंपे भी दो हफ्ते से ज्यादा का समय हो गया है, पर सरकार ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है, जो बताता है कि साहब के आका मैदान में उतर आए हैं। उनकी सहानुभूति पहले से साहब के साथ है। वे मौके पर कहते भी रहे हैं कि उसे गलत फंसा दिया।

Posted By: Ravindra Soni

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