भोपाल। मध्यप्रदेश में 2017 में दो लाख 69 हजार 512 अपराध भारतीय दंड विधान (आईपीसी) में पंजीबद्ध हुए हैं जो देशभर में दर्ज कुल मामलों का करीब 8.8 प्रतिशत है। यह भी 2016 की तुलना में 5094 ज्यादा हैं। खास बात यह है कि इन आंकड़ों की तुलना में मप्र से आगे केवल उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र ही हैं। यहां क्रमश: 10.1 और 9.4 प्रतिशत मामले दर्ज आईपीसी में दर्ज हुए।

राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2017 की रिपोर्ट में यह आंकड़े जारी किए गए हैं। महिला संबंधी अपराधों के मामले में भी मध्यप्रदेश देश में तीसरे नंबर का राज्य है। सबसे ज्यादा महिला संबंधी अपराध 2017 में उत्तरप्रदेश और उसके बाद महाराष्ट्र में दर्ज हुए। मप्र में 2017 में महिला संबंधी अपराध 29 हजार 788 दर्ज हुए, जबकि 2016 में यह संख्या 26 हजार 604 थे।

दहेज हत्या में पांचवें नंबर मप्र

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक दहेज हत्या के मामले में मप्र में 632 प्रकरणों में 635 लोग प्रभावित रहे। इस मामले में भी मप्र की स्थिति उत्तरप्रदेश, बिहार, हरियाणा व त्रिपुरा के बाद पांचवें स्थान पर रही। दहेज प्रताड़ना के मामलों में भी मध्यप्रदेश में 2016 की तुलना में 2017 में 16.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इन मामलों में आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में मध्यप्रदेश से भी ज्यादा खराब स्थिति है।

यौन उत्पीड़न के मामलों में भी बदनाम

महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों में 2017 में मध्यप्रदेश काफी बदनाम रहा। 2956 प्रकरणों में 2985 महिलाओं के पीड़ित होने के मामलों की वजह से देश में दर्ज ऐसे प्रकणों में मप्र की हिस्सेदारी 7.8 प्रतिशत रही। वहीं, महिलाओं पर हमलों के 4906 प्रकरण पंजीबद्ध हुए, जिनमें 5016 महिलाएं पीड़ित हुईं। इसमें भी मध्यप्रदेश की स्थिति केवल असम, जम्मू-कश्मीर, केरल और ओडिशा से बेहतर रही।

Posted By: Hemant Upadhyay