Navdunia Deepak Vishwakarma Column: दीपक विश्‍वकर्मा, भोपाल। राजधानी के एक अपर कलेक्टर स्तर के अफसर की सलाहकार की भूमिका इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। पहले वे एक विधायक के पावर में आने के बाद उनके सलाहकार बन गए थे, अब एक मंत्री से अच्छी पैठ बनाने के लिए उनके रायचंद बन गए हैं। साहब की आदत है कि वे कहीं भी दौरा करने जाते हैं तो अपने वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर दौरा कार्यक्रम प्लान करवाते हैं। बाद में स्वयं संबंधित स्थान पर पहुंचकर कहते हैं कि साहब नहीं आ पाए, उन्होंने मुझे भेजा है। बताया जा रहा है कि वे वरिष्ठ अफसर को भी सलाह देने से नहीं चूकते हैं। इन्हीं की सलाह पर बीते दिनों सभी तहसील और सर्किल कार्यालयों में गुपचुप निरीक्षण को अमलीजामा पहनाया गया। इस दौरान फाइलें देखी गईं और प्रशस्ति पत्र भी वितरित किए गए। अब साहब को जिले की कमान मिलने का इंतजार है।

मलाईदार पदों की जुगत

कलेक्ट्रेट कार्यालय में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार स्तर के अफसर इन दिनों दो मौकों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। पहला प्रमोशन और दूसरा कार्यक्षेत्र में बंटवारा। विगत दो साल से ये अफसर एक ही पद पर डटे हुए हैं। यही कारण है कि अब इन्हें नई जगह जाने की बेताबी सता रही है। इधर, जिले की कमान संभाल रहे अफसर फिलहाल कोई बदलाव के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन हर स्तर का अधिकारी अपनी जिम्मेदारी में बदलाव और मनचाही तहसील में जाकर अपना हुनर दिखाना चाहता है। तहसील हुजूर, कोलार और बैरसिया में अन्य सर्किलों में पदस्थ अफसरों की नजर लंबे अरसे से टिकी हुई है। एक साहब तो इसके लिए पूरी जुगत लगा चुके हैं लेकिन फेरबदल न होने से मायूस होकर काम देख रहे हैं। अगर फेरबदल होता है तो अफसरों का मनोबल भी बढ़ा रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

कभी तो फंसेगी मछली

राजधानी की कोलार तहसील इन दिनों भ्रष्टाचार और शिकवे शिकायतों का गढ़ बनी हुई है। यहां पदस्थ अफसरों पर कार्रवाई करने के लिए दो दिन से लोकायुक्त पुलिस अचानक दबिश देने पहुंच रही है लेकिन कमाल है कि अफसरों को भनक पहले ही लग जाती है। वे सबकुछ छोड़कर भाग खड़े होते हैं। दो दिन पहले ही में एक वाक्या सामने आया, जब लोकायुक्त की टीम तहसील कार्यालय में पहुंची लेकिन संबंधित अधिकारी ड्रायवर न मिलने पर खुद का वाहन छोड़कर भाग गया। इधर, इस तहसील कार्यालय में पदस्थ एक रीडर पर भी लोकायुक्त पुलिस घात लगाए बैठी है। हालांकि तहसील के भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथ पकड़ने की कोशिश अब तक दो बार तो विफल हो चुकी है लेकिन लोकायुक्त भी अपना जाल पर जाल फेंके जा रही है। उसे पूरा भरोसा है कभी तो भ्रष्टाचारी मछली जाल में फंसेगी और जब भी फंसेगी तो पूरा तालाब ही साफ होगा।

किसी से दुलार तो किसी को फटकार

राजधानी में दो माह में रिटायर होने वाले एक साहब ऐसे हैं जो सेवाकाल के आखिरी दिनों में भी पूरी एनर्जी से काम कर रहे हैं। इन साहब के बारे में बताया जा रहा है कि हाल ही में इन्होंने उपायुक्त के जरिए एसडीएम कोर्ट और उनके कामकाज का निरीक्षण करवाया। इस निरीक्षण के बाद एक बैठक कर इसकी रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में किसी अफसर को जमकर फटकार लगाई गई तो कुछ लोगों को दुलार दिया गया। उपायुक्त के निरीक्षण के आधार पर कुछ अफसरों को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किए गए। एसडीएम बैरागढ़ को प्रशस्ति पत्र दिया गया तो बैरसिया और गोविंदपुरा एसडीएम को नाराजगी का सामना करना पड़ा। अब इन अफसरों में असमंजस की स्थिति यह बनी हुई है कि आखिर यह सारी कवायद क्यों की जा रही है। वर्तमान में टीकाकरण, कोरोना संक्रमण का नियंत्रण सहित अन्य कामकाज भी बखूबी करने पड़ रहे हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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