Navratri 2022: भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी के शाहजहांनी पार्क छोटे तालाब के किनारे स्थित तलैया काली घाट मां काली मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पहले तालाब किनारे माता की एक मढ़िया हुआ करती थी। अब यहां विशाल भव्य मंदिर है। शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में यहां अलसुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मां काली के दर्शन करने पुराने, नए शहर सहित उपनगर कोलार, भेल, संत हिरदाराम नगर से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इतना नहीं सीहोर, विदिश, रायसेन से भी नवरात्र के दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहां पर अखंड ज्योत जलती रहती है। मां काली श्रद्धालुओं की मनोकामना जरूर पूरी करती हैं।

यह है मंदिर का इतिहास

51 साल पहले वर्ष 1967 में स्वर्गीय शिवनारायण सिंह बगवार ने मंदिर की स्थापना की थी। पहले इस मंदिर का स्वरूप छोटी सी मढ़िया था, लेकिन भक्तों की श्रद्धा के कारण मंदिर का विस्तार होता ही चला गया और आज मंदिर भव्य रूप ले चुका है। 108 फीट ऊंचा शिखर मंदिर में स्थापित किया गया है।

सुबह चार बजे से होता है श्रृंगार

मां काली जी का नवरात्र में सुबह चार बजे से श्रृंगार शुरू किया जाता है। सुबह छह बजे तक श्रृंगार चलता है। इसके बाद भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के गर्भगृह के द्वार खोले जाते हैं। गर्भगृह में अधिक भीड़ न हो, इसलिए एक-एक करके भक्तों को प्रवेश दिया जाता है। भक्त मातारानी को पुष्प अर्पित करते हैं। -रजनीश सिंह बगवार, प्रमुख कालिका मंदिर धर्मार्थ न्यास कालीघाट

बांधा जाता है मनोकामना के लिए धागा

मां के गर्भगृह के पीछे मनोकामना मांगने के लिए भक्तगण धागा बांधते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु धागा खोलने आते हैं। नवरात्र में श्रद्धालु विभिन्न अनुष्ठान करने आते हैं। भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्र के दिनों में तो यहां मेले-सा माहौल हो जाता है। हजारों की संख्या में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से यहां मां कालिका के दर्शन करने श्रद्धालु आते हैं। - पवन महाराज, पुजारी

भंडारों का आयोजन

यूं तो मंदिर प्रांगण में वर्ष भर में भंडारे को आयोजन होता रहता है। कभी कोई तो कभी कोई मनोकामना पूरी होने पर मंदिर प्रांगण में भंडारा कराने आते हैं। नवरात्र में कई लोग मां काली के दर्शन करके प्रसादी के रूप में पूरी सब्जी जरूरतमंद लोगों को वितरण करते हैं। मंदिर के बाहर लगी फूल, प्रसाद व पूजन सामग्री के दुकानदार भी मंदिर प्रांगण में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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