दक्षा वैदकर, भोपाल। नवरात्र के ये नौ दिन सिर्फ देवी की आराधना करने के लिए नहीं हैं। ये तो धरती पर देवी के रूप यानी स्त्री, बालिकाओं की सम्मान, उनकी रक्षा, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में हर संभव प्रयास करने के संकल्प के दिन हैं।आज ही ये नौ संकल्प खुद से करें और देवी की पूजा को सार्थक बनाएं।

1. हर बेटी हो सुरक्षित

बेटी अपनी हो या पराई, मदद हो सभी की। जब भी दिखे कोई मुसीबत में, डंटकर खड़े हो जाएं उसके सम्मान की रक्षा को। आज आप किसी की बेटी को बचाएंगे, कल कोई और आपकी बेटी को बचाएगा।

2. अधिकार दें बराबर

लड़की नहीं है पराया धन। शादी के बाद भी उसका हक है मायके पर और पिता की संपत्ति पर, ताकि रिश्तों में धोखा मिलने पर या साथ छूटने पर भी उसका भविष्य अंधकार में न डूबे।

3. बनाएं आत्मनिर्भर

लड़कियों को पढ़ा-लिखा कर विदाई की तैयारी न करें। बनाएं उसे आत्मनिर्भर। सिखाएं कि शादी के बाद भी खुद की जिंदगी की बागडोर अपने ही हाथ में रखनी है, पैरों पर खड़े रहना है।

4. न रखें भेदभाव

बेटे को दूध और बेटी को चाय। बेटे को गर्म खाना और बेटी प्लेट उठाए। बेटा बाइक घूमाए और बेटी बस में धक्के खाए। जरूरत है, ऐसे भेदभाव जड़ से खत्म हो जाएं।

5. घर की स्त्री मुस्कुराए

पुरुषों की ताकत तभी काम की, जब स्त्री की रक्षा करे। वह ताकत बेकार है जो स्त्री की ही आवाज दबाए, उसका शोषण करें। सच्चा पुरुष वही, जिसके घर की स्त्री मुस्कुराए। उसके चेहरे पर डर, दुख के भाव न आएं।

6. हर स्त्री सम्मानीय

सम्मान सिर्फ घर की पत्नी, बेटी व मां का ही नहीं हर स्त्री का हो, फिर वह कार्यस्थल पर हो या राह चलती हो।बच्ची हो या बुजुर्ग हो। सम्मान आंखों में नजर आए और नरमी बातों से जाहिर हो।

7. निर्णय का अधिकार

कोर्स, कालेज, ड्रेस, गाड़ी के चुनाव के साथ ही बेटी को दें जीवनसाथी चुनने का अधिकार, क्योंकि यही है उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला, जिसका असर सबसे ज्यादा उसी पर पड़नेवाला है।

8. गुणों का सम्मान

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक का मुकाम हासिल कर चुकी महिलाओं के गुणों पर अब प्रश्नचिह्न न उठाएं।उसके विचारों व मत को भी महत्व दें। ज्ञान को सम्मान दें। आगे बढ़ने का मौका दें।

9. जन्म पर दुखी न हों

बेटा एक कुल का चिराग है तो बेटी दो घरों का अभिमान है। जिस घर में इसके पांव पड़े, उस घर में होता लक्ष्मी का वास है। बेटी सृष्टि का आधार है। इनसे ही चलता वंश व पूरा संसार है।

Posted By: Lalit Katariya

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