Navratri Day 05: भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। नवरात्र पर्व पर नौ दिनों में देवी जगदंबा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। आज आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि है। इस तिथि को मां कात्यायनी की विशेष तौर पर पूजा-अर्चना की जाती है। सिंह पर सवार मां कात्यायनी का स्वरूप तेजोमय एवं चमकीला है। चार भुजा धारी मां कात्यायनी का दायीं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है, वहीं दांयी ओर का नीचे वाला था वर मुद्रा में है। मां कात्यायनी बायीं ऊपर की ओर वाली भुजा में तलवार धारण करती हैं व उनके नीचे वाले हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित रहता है। माता कात्यायनी को लाल रंग सर्वाधिक पसंद है। कहते हैं कि महर्षि कात्यायन की तपस्या के बाद माता कात्यायनी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था। मां दुर्गा ने इन्हीं के रूप में महिषासुर का वध कर उसके आतंक से देवों और मनुष्यों को भय मुक्त किया था। ऐसी मान्यता है कि माता कात्यायनी की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना करने से मनुष्य के बिगड़े काम भी बन जाते है तथा उसके समस्त कष्टों का नाश होता है। माता कात्यायनी को मन की शक्ति की देवी भी कहा गया है। माता कात्यायनी की कृपा पाकर व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में कर सकता है।

पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब पूजा स्थान में चौकी पर कात्यायनी की तस्वीर/प्रतिमा स्थापित करें। एक कलश में जल लेकर उसे चौकी पर रखें। माता कात्यायनी की पूजा का संकल्प लें। इसके बाद कात्यायनी को रोली-कुंकुम लगाएं, अक्षत, पुष्प नैवेद्य अर्पित करें। माता कात्यायनी को लाल रंग पसंद है, इसलिए आप उन्हें गुड़हल या अन्य कोई लाल पुष्प अर्पित करें। उसके बाद उनके प्रिय भोग शहद को अर्पित करें और मिठाई इत्यादि का भी भोग लगाएं। फिर जल अर्पित करें और घी के दीपक जलाकर माता की आरती करें। इसके उपरांत प्रसाद वितरण करें।

मां कात्यायनी का आराधना मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|

कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||

मां कात्यायनी की आरती

जय-जय अम्बे जय कात्यायनी।

जय जगमाता जग की महारानी।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।

वहा वरदाती नाम पुकारा।

कई नाम है कई धाम है।

यह स्थान भी तो सुखधाम है।

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।

कही योगेश्वरी महिमा न्यारी।

हर जगह उत्सव होते रहते।

हर मंदिर में भगत हैं कहते।

कत्यानी रक्षक काया की।

ग्रंथि काटे मोह माया की।

झूठे मोह से छुडाने वाली।

अपना नाम जपाने वाली।

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।

ध्यान कात्यायनी का धरिए।

हर संकट को दूर करेगी।

भंडारे भरपूर करेगी।

जो भी मां को भक्त पुकारे

कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

Posted By: Ravindra Soni

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