भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। नए शहर के टीटी नगर क्षेत्र का माता मंदिर पूरे शहर में प्रसिद्ध है। मान्यता है प्राचीन माता मंदिर में शीतला मां की मूर्ति प्रकट हुई थी। विराजित माता कि मूर्ती स्वयंभू है। मूर्ति का निर्माण कराने के बाद इसकी स्थापना नहीं की गई। मंदिर में मां शीतला पिंडी के रूप में विराजमान हैं। नवरात्र पर मां शीतला के दर्शन करने आसपास के जिलों से भी सैकड़ों श्रद्धालु आ रहे हैं। मंदिर के नाम से चौराहे का नाम माता मंदिर पड़ा है। माता मंदिर चौराहा नए शहर के प्रमुख चौराहों में गिना जाता है।

यह है इतिहास

माता मंदिर में नवाबी दौर से पहले यहां खजूर के पेड़ से मां शीतला माता स्वयं प्रकट हुईं थीं। फिर मढ़िया बना कर पूजा-अर्चना शुरू हो गई। अब मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है। ऐसी मान्यता है कि माता के त्रिशूल पर चुन्नी बांधने से हर मनोकामना पूरी होती है। वर्तमान में मंदिर प्रांगण में मां काली, शिवजी, श्रीराम दरबार, हनुमानजी सहित अन्य देवी-देवता विराजित हैं।

रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग है मंदिर

माता मंदिर के चारों तरफ विद्युत साज-सज्जा की गई है। नवरात्र में हर साल माता मंदिर की रंग-बिरंग साज-सज्जा की जाती है। कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो सालों से श्रद्धालु नहीं आ रहे थे। सार्वजनिक पूजा-अर्चना पर रोक लगी हुई थी। इस नवरात्र पर सैकड़ों श्रद्धालु मातारानी के दरबार में आ रहे हैं।

मंदिर के आसपास हुआ करता था जंगल

मंदिर में मां शीतला की पूजा-अर्चना चतुर्वेदी परिवार की पांचवी पीढ़ी कर रही है। बताया जाता है कि माता जब प्रकट हुई थीं। उस समय आसपास जंगल हुआ करता था। नीलबड़, रातीबड़, कोटरा गांव, कोलार के गांवों से लोग माता की पूजा-अर्चना करने आते थे। अब आसपास घनी आबादी हो गई है। अब यह मंदिर नए शहर के बीचों-बीच आ गया है।

-राजीव चतुर्वेदी, मंदिर प्रमुख

वाहनों की पूजा करने आते हैं लोग

माता मंदिर में आसपास के लोग नए दोपहिया व चार पहिया वाहनों की पूजा करने आते हैं। शारदीय नवरात्र में मातारानी के दरबार में बड़ी संख्या में लोग वाहनों की पूजा कराने आ रहे हैं। मातारानी को चुनरी अर्पित करते हैं। माता को चढ़ाई हुई चुनरी गाड़ियों में बांधते हैं। बताया जाता है कि माताजी के दरबार में जो श्रद्धालु वाहनों की पूजा कराने आते हैं, माता जी की कृपा सदा बनी रहती है।

- राकेश कुमार, पुजारी, माता मंदिर

Posted By: Ravindra Soni

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