भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। कीर्ति बैले एंड परफॉर्मिंग आर्ट की ओर से स्व. प्रभात गांगुली को समर्पित करते हुए चारदिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव 'धरोहर-11' का आयोजन शहीद भवन में किया जा रहा है। महोत्सव के पहले दिन सोमवार शाम मनोज नायर के निर्देशन में नाटक 'नेपथ्य में शकुंतला" का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से दर्शकों को यह बताया गया कि प्रत्येक मनुष्य खुद को श्रेष्ठ समझता है और अपनी क्षमताओं से परे परिणाम चाहता है। श्रेष्ठतम की खोज में वर्तमान क्षमताओं से पलायन करता है। उसे इससे बचना चाहिए। प्रस्तुति से पूर्व नाट्य निर्देशक स्व. बंसी कौल को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

सपने में आते हैं मछली, शेर, हिरण

नाटक में मुख्य किरदार मानव होता है। वह शकुंतला नाटक में छोटा सा किरदार निभा रहा है, लेकिन उस किरदार से वह असंतुष्ट होकर उसी दिन नाटक से जाने की बात करता है। जाने से पहले वहां रुककर बैकस्टेज की प्रॉपर्टी जमा कर वहीं सो जाता है। नाटक के पात्र हिरण, भौंरा, मछली, शेर जिनकी मदद से शकुंतला और दुष्यंत का मिलन होता है, वे मानव के सपने में आते हैं और उसे बड़े ही अनोखे ढंग से समझाते हैं। उसकी क्षमता, खासियत, अंदर छिपी ताकत को बताते हैं और उसे सकारात्मक बोध कराते हैं। अंत में दिखाया कि मानव नींद से जागता है और जागते ही नाटक करने के लिए कहता है।

सिद्धराम स्वामी को गांगुली रंगरत्न सम्मान

प्रस्तुति से पूर्व संगीताचार्य पंडित सिद्धराम स्वामी कोरवार को स्व. प्रभात गांगुली रंगरत्न सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्‍हें यह सम्‍मान मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर ने प्रदान किया। इसके साथ ही रंगकर्मी अशोक बुलानी, मनोज नायर और मुकेश शर्मा को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

Posted By: Ravindra Soni

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