- प्रदेश में प्रतिदिन 45 टन मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन, बाकी की जरूरत पड़ोसी राज्यों से हो रही है पूरी, जुलाई में 40 टन थी खपत, सिंतबर में 90 टन पहुंची

भोपाल (नवदुनिया स्टेट ब्यूरो)। कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या और ऑक्सीजन की मांग ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। प्रदेश में कोरोना के सक्रिय प्रकरण 22165 हैं। जुलाई में ऑक्सीजन की खपत 40 टन के आसपास थी, जो बढ़कर 90 टन हो गई है। सितंबर अंत तक इसके 110 टन प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मद्देनजर सरकार ने केंद्र की मदद से अतिरिक्त ऑक्सीजन का इंतजाम तो कर लिया है पर आपूर्ति के लिए टैंकर की कमी सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ स्थित भिलाई स्टील प्लांट से ऑक्सीजन मिल रही है पर टैंकर का इंतजाम उद्यमियों से करने के लिए कहा जा रहा है।

प्रदेश में ऑक्सीजन के भंडारण की क्षमता 160 टन के आसपास है। 16 हजार सिलेंडर हैं, जिनमें नौ हजार जंबो सिलेंडर हैं। एक जंबो सिलेंडर में सात क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आती है। जबकि छोटे सिलेंडर में 1.5 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जुलाई में ऑक्सीजन की खपत 40 टन के आसपास थी जो कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण सितंबर के पहले सप्ताह तक 90 टन तक पहुंच गई। प्रमुख सचिव उद्योग संजय शुक्ला का कहना है कि भिलाई स्टील प्लांट से प्रतिदिन 50 टन ऑक्सीजन का आपूर्ति का करार किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक भिलाई से ऑक्सीजन के परिवहन की व्यवस्था नहीं बन पाई है। उधर, मंडीदीप ऑल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल का कहना है कि उद्योगों को भी ऑक्सीजन की जरूरत है। छत्तीसगढ़ से ऑक्सीजन आ सकती है पर इसके लिए टैंकर नहीं हैं। एक टैंकर 80 से 90 लाख रुपये का आता है पर यह भी चार माह बाद मिल रहा है। इसे लेकर उद्योग विभाग टैंकर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए परिवहनकर्ताओं से संपर्क कर रहा है। कलेक्टरों को भी जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अपने स्तर पर व्यवस्था बनाएं।

पहले ही प्लांट लगा लेते तो आत्मनिर्भर हो जाता प्रदेश

मप्र के स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल में कोरोना का संक्रमण बढ़ने पर आगामी तीन महीने की योजना बनाई थी। इसमें बताया गया था कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक प्रदेश में दो लाख 60 हजार लोग कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। इस हिसाब से विभाग ने तैयारियां भी कीं। उस समय भी ऑक्सीजन की मांग बढ़ने की बात सामने आई थी। तब अफसरों ने दूसरे राज्यों से अधिक ऑक्सीजन मंगाने की तैयारी कर ली, लेकिन मप्र में ही ऑक्सीजन प्लांट लगाने के बारे में विचार नहीं किया। यदि उसी समय प्लांट लगाने पर काम शुरू हो जाता तो आज मप्र आत्मनिर्भर होता और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों पर ऑक्सीजन के लिए निर्भर नहीं होना पड़ता। अब प्रदेश सरकार ऑक्सीजन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में लाकर मॉनीटरिंग करने की योजना बना रही है। वहीं प्रदेश में 12 स्थानों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी भी चल रही है। इसमें प्रदेश का सबसे बड़ा प्लांट होशंगाबाद के बाबई में लगाया जाएगा।

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राजधानी के कोविड अस्पतालों में कहां कितनी ऑक्सीजन की खपत

- हमीदिया प्रबंधन के अनुसार पहले 400 घनमीटर प्रतिदिन लगती थी, अब यह बढ़कर 900 घनमीटर प्रतिदिन पर पहुंच गई है।

- चिरायु अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय गोयनका के मुताबिक वर्तमान में ऑक्सीजन की खपत पांच गुना तक बढ़ गई।

- एलएन मेडिकल के अधिकारी अरुण पिल्लई के अनुसार 890 लीटर प्रति मिनट से बढ़कर खपत 2300 लीटर प्रति मिनट पर पहुंच गई है।

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ऑक्सीजन सिलेंडर उधार लेकर बचाई जान

-केस-1 मेडिकल कॉलेज शहडोल में मार्च से पहले रोज पांच सिलेंडर ऑक्सीजन की खपत थी, लेकिन कोराना के बढ़ते कहर के बाद अब 120 सिलेंडर लग रहे हैं। कुछ दिन पहले ऑक्सीजन खत्म हो गई तो उमरिया-अनूपपुर और साउथ ईस्ट कोल फील्ड्स लिमिटेड से 40 सिलेंडर उधार लेकर मरीजों की जान बचाई।

गुना के सिलेंडर ग्वालियर में उतारे

ग्वालियर में अगस्त अंत में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने से ऑक्सीजन की खपत 1200 सिलेंडर तक पहुंच गई थी। संकट से निपटने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर गुना जा रही गाड़ी से 200 सिलेंडर उतारे गए और स्टोर पर ताला डालना पड़ा। प्रशासन अब भिलाई से इंतजाम कर रहा है।

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मप्र में प्रतिदिन अभी 90 से 100 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। इसके एवज में प्रदेश सरकार के पास 130 से 140 टन प्रतिदिन ऑक्सीजन आ रही है। भिलाई से आपूर्ति के बाद प्रदेश में 180 से 190 टन ऑक्सीजन उपलब्ध होगी।

- धनराजू एस, डायरेक्टर, एनएचएएम प्रोजेक्ट इंचार्ज ऑक्सीजन सप्लाई

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महाराष्ट्र सरकार के आदेश पर हाई कोर्ट की रोक

इंदौर (नप्र)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मध्य प्रदेश को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की जा सकेगी। इंदौर के एमवाय अस्पताल प्रबंधन ने महाराष्ट्र सरकार के सात सितंबर के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की युगल पीठ ने आदेश पर रोक लगाते हुए महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। अब मामले में 19 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

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जेपी में ऑक्सीजन खत्म होने से हड़कंप

बुधवार को जेपी अस्पताल में सुबह ऑक्सीजन के सिलेंडर खत्म हो गए। इसके बाद दोपहर तक पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा। आनन-फानन में यहां स्टॉक में रखे अतिरिक्त छोटे सिलेंडर लगाकर काम चलाना पड़ा। करीब साढ़े तीन बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकी। जब इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से चर्चा की गई तो उन्होंने ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त होने की बात कहकर इसे अफवाह बताया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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