भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। भोपाल रेलवे स्टेशन पर डेढ़ साल पहले छह करोड़ की लागत से बिल्डिंग बनाई गई थी। अब तक इससे एक स्र्पये की कमाई शुरू नहीं हुई है। टिकट काउंटर के अलावा यात्रियों को सुविधा भी नहीं मिल रही है। तब भी प्लेटफार्म एक की तरफ करोड़ों स्र्पये की लागत से दूसरी नई बिल्डिंग तानी जा रही है। दरअसल, इस बिल्डिंग के उपयोग को लेकर रेलवे के पास पक्की कार्ययोजना नहीं है। स्टेशन पर इस तरह के खर्च ऐसे समय में किए जा रहे हैं, जब रेलवे बोर्ड लगातार खर्च में कटौती करने और गैरजरूरी कामों को नहीं करने की सलाह दे रहा है।

बिल्डिंग से ज्यादा अतिरिक्त रेल लाइन की जरूरत

मंडल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य निरंजन वाधवानी व अन्य बताते हैं कि भोपाल स्टेशन पर इटारसी की तरफ ट्रेन चलाने के लिए एकमात्र लाइन है, जो प्लेटफार्म एक से होकर गुजरती है। इसी लाइन के जरिए ट्रेनें प्लेटफार्म एक पर रुकती है। थ्रू गुजरने वाली ट्रेनों को भी इसी लाइन से चलाया जा रहा है। प्रत्येक स्टेशन पर एक लूप लाइन, जिस पर ट्रेनों को रोककर चलाया जा सके और दूसरी मेन लाइन होती है, जिसके जरिए सीधे गुजरने वाली ट्रेनों को दौड़ाया जाता है। हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर भी एक दिशा में गुजरने वाली ट्रेनों के लिए दो लाइनें हैं।

बिल्डिंग बनाकर बंद किया रेल लाइन बिछाने का विकल्प

रेलवे मामलों के जानकार और पूर्व स्टेशन प्रबंधक आरपी मगरैया कहते हैं कि भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक की तरफ जहां से लाइन बिछाई जा सकती थी, वहां पर नई बिल्डिंग का काम चालू करके विकल्‍प समाप्‍त किया जा रहा है। भविष्य में यहां लाइन नहीं बिछा सकेंगे। यदि बिछाने की कोशिशें की गईं तो करोड़ों खर्च कर बनाई जा रही बिल्डिंग को तोड़ना पड़ेगा। इस तरह रेलवे की राशि की बर्बादी होगी।

आइआरसीटीसी ने खींचे हाथ, रेलवे खुद जुटा

प्लेटफार्म छह की तरफ बनकर तैयार बिल्डिंग में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पारेशन को बजट होटल, रेस्टोरेंट खुलवाना था। रेलवे सूत्रों की माने तो आइआरसीटीसी ने हाथ खींच लिए। अब रेलवे का वाणिज्य विभाग अपने स्तर पर आमदनी बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है। इस काम में वाणिज्य के अधिकारियों को लगाया गया है। अभी तक इसके जरिए आमदनी बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं मिला है। भोपाल रेल मंडल के अधिकारी इस विषय पर बोलने से भी बच रहे हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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