भोपाल। अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों ने सरकार पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाते हुए भाजपा के खिलाफ माहौल तैयार करने का ऐलान कर दिया है।

सपाक्स के न्याय दिवस कार्यक्रम में पहुंचे वक्ता बोले- अब ऐसा करेंगे कि हाईकमान खुद प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन पर मजबूर हो जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, जैसे वे सिर्फ आरक्षित वर्ग के मुख्यमंत्री हों।

पदोन्न्ति में आरक्षण के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में जबलपुर हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने वर्ष 2002 के पदोन्न्ति कानून को खारिज कर दिया था।

सपाक्स ने इस ऐतिहासिक दिन को न्याय दिवस के रूप में मनाया है। रविवार को तुलसी नगर स्थित नर्मदा मंदिर में सपाक्स ने कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पूर्व आईएएस अफसर पीएस तोमर, पूर्व आईपीएस अफसर परमाल सिंह तोमर सहित जैन, क्षत्रिय एवं यादव समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।

यहां वक्ताओं ने शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया और इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करने का ऐलान किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार विधानसभा चुनाव तक इस मामले को उलझाकर रखना चाहती है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। हम सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका लगाकर जल्द सुनवाई की मांग करेंगे। बाद में 'हम हैं माई के लाल" की टोपी लगाए कर्मचारियों ने सेकंड स्टाप बाजार तक रैली निकाली। वहीं प्रदेश में सभी जिला मुख्यालयों पर रैली निकाली गई।

12 जून को प्रदेशभर में फिर से रैली

संगठन 12 मई को धिक्कार रैली निकालेगा। वक्ताओं ने कर्मचारी और समाज का आह्वान किया है कि इस रैली की गूंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नागपुर में बैठे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं तक जानी चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि एक वर्ग विशेष के वोट की खातिर पार्टी की साख दाव पर लगा दी गई है।

सांसद-विधायकों से मांग रहे सहयोग

सपाक्स ने सांसद और विधायकों से सहयोग की कोशिशें शुरू कर दी हैं। संगठन सभी को पत्र लिखकर इस लड़ाई में सहयोग मांग रहा है।

नामी चेहरे बनाए हुए हैं दूरी

अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी संगठन सपाक्स में भरोसा जताने और आर्थिक सहयोग देने वाले नामी चेहरे संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। रविवार को संगठन ने न्याय दिवस मनाया, लेकिन सपाक्स समाज संस्था के अध्यक्ष ललित शास्त्री सहित नामी चेहरे नजर नहीं आए। इतना ही नहीं, संगठन आठ माह में तीन कार्यक्रम कर चुका है, लेकिन लोग सामने नहीं आ रहे हैं। मंच से इस पर चिंता भी जताई गई है। माना जा रहा है कि लोग सरकार की सख्ती से बचने के लिए एहतियात बरत रहे हैं।

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