दिल्ली पहुंच गए नेताजी से मिलने

भले ही जिले की कप्तानी एक बार भी न मिली हो, लेकिन युवा आइपीएस अधिकारी तेजी से अपना जनसंपर्क बढ़ा रहे हैं। पिछले दिनों वे एक पार्टी के वजनदार नेता से मिलने के लिए दिल्ली तक पहुंच गए। उन्होंने अपनी इस मेल मुलाकत को गोपनीय रखने की भरसक कोशिश की, यहां तक कि उन्होंने अपने दोस्त व साथ बैठने वालों को भी इसकी भनक तक नहीं लगने दी थी। आइपीएस जिस नेता से मिलने गए थे, उनकी मप्र के एक मंत्री से पार्टी के कार्यक्रम में मुलाकत हुई। बातचीत में आइपीएस अफसर का जिक्र निकल आया। नेता जी ने मंत्री से अफसर को जिले की कप्तानी देने की सिफारिश भी कर दी और उनकी यात्रा के वृतांत भी सुनाए। नेताजी ने आइपीएस के साथ सेल्फी भी दिखाई। कहा जाता है कि पिछली सरकार में आइपीएस की एक तरफा चलती थी। सरकार जाने के बाद से वे अभी लूपलाइन में हैं।

साहब को मिला प्रचारक का साथ

राजधानी में तैनात एक अफसर के बदलने की चर्चा हर सप्ताह शुरू हो जाती है। उनके बदले में नए नाम भी सामने आते हैं। पहले पुराने एसपी का नाम चला, लेकिन बाद में वह मलाईदार विभाग में चले गए। फिर एक युवा आइपीएस का नाम सामने आया, लेकिन उनकी एक आदत के कारण नाम ही आगे नहीं बढ़ा। फिर एक डाक्टर साहब का नाम चला, उन्हें सरकार ने ही खारिज कर दिया। इस पद के लिए डॉक्टर साहब ने भी ज्यादा दिलचस्पीे नहीं दिखाई। अब एक पंडित जी का नाम चर्चा में है, उनसे बातचीत का दौर भी शुरू हो गया है, भोपाल में बेहद कम समय के लिए एसपी भी रह चुके हैं, लेकिन जिन साहब को हटाने को लेकर बार बार चर्चाओं का दौर शुरू होता है, उन्हें संघ के एक पुराने प्रचारक का साथ मिल गया है। इसके बाद से वह काफी मजबूत महसूस कर रहे हैं।

कप्तानी करेंगे तो बड़े जिले की

आइपीएस अफसर को नौकरी के शुरूआती दिनों के जिले की याद आ रही है। वह उसी जिले का कप्तान बनना चाहते हैं। इसका कारण यह है कि उसी जिले से उन्होंने प्रशिक्षु डीएसपी रहते पुलिस की नौकरी का क-ख-ग सीखा था। उसके बाद वह उसी जिले में डीएसपी और एएसपी रहे । बाद में आईपीएस अवार्ड होने के बाद शासन ने उनको कुछ माह पहले ही एक सीधी भर्ती के आईपीएस अफसर को हटाकर विंध्य के एक जिले का कप्तान बनाया है। जिला छोटा है मन नहीं लग रहा तो अब बड़े जिले की कप्तानी करने का मन बनाया है। उनका जिले से भोपाल आना जाना ज्यादा हो रहा था। इस दौरान वह कोरोना संक्रमित भी हो गए, लेकिन संक्रमित हो जाने के बाद भी उन्होंने इस दिशा में कोशिश करना कम नहीं की है, वह खुद नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन खबर पूरी रख रहे हैं।

फोटो ने खोला राज

पिछले दिनों एक नौ माह की मासूम की हत्या का मामला तलैया पुलिस ने चार दिन में खोलकर रख दिया था। पहली बार पुलिस को इतनी मेहनत करते करीब से देखा जब टीआइ से लेकर थाने के बाकी पुलिस कर्मी हत्या के आरोपित को सामने लाने के लिए दो दिन तक घर नहीं गए। जैसे ही बधाी का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रायसेन जिले पहुंचा और उसकी पहचान हो गई। सूचना मिलते ही तलैया थाना प्रभारी डीपी सिंह खुद रायसेन और औबेदुल्लागंज थाने पहुंच गए। जहां पर बधाी के पिता से लेकर उसके नाना से खुद पूछताछ कर उनके बयान लेकर पूरे मामले को समझा। बाद में बधाी की मां और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया। उनकी टीम जरा सी चूक करती तो आरोपित शहर छोड़कर भागने की फिराक में थे। इस मामले में बड़े कप्तान से लेकर महकमे के कई अफसरों ने टीआइ की पीठ थपथपाई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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