- मार्च 2016 में छोटे तालाब में रात नौ बजे युवक नाव में पार्टी मनाने पहुंचे थे। इनमें से एक नाचने लगा तभी नाव डूब गई थी, जिसमें पांच युवकों की मौत हो गई थी।

- जून 2016 में एलबीएस अस्पताल के सामने मोतिया तालाब में नहाने गए तीन बच्चे पानी में डूब गए थे। इसमें दो की मौत हो गई थी, जबकि एक को बचा लिया गया था।

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सूर्यास्त के बाद नाव चलाने पर है रोक...नहीं हुआ अमल

तत्कालीन कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव ने बड़े तालाब में एक नाव पलटने पर धारा 144 के तहत शहर के सभी जलाशयों में सूर्यास्त के बाद नाव चलाने पर रोक लगाने का स्थायी आदेश जारी किया था। लेकिन प्रशासन अफसरों ने इस आदेश का पालन नहीं कराया।

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एसडीएम व पुलिस को बनानी थी व्यवस्था

नगर निगम का काम व्यवस्था बनाने का है, लेकिन नाव में कितने लोग जा रहे हैं, यह देखना एसडीएम और पुलिस का जिम्मा है। निगम स्तर पर क्या चूक हुई है, निगम आयुक्त को जांच करने के लिए कहा गया है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शहर में बड़ी मूर्तियां न बनें, इसके लिए हम मूर्तिकारों की बैठक बुलाएंगे। विसर्जन का समय भी तय होना चाहिए। तमाम बिंदुओं पर कलेक्टर से मिलकर नीति तैयार की जाएगी।

आलोक शर्मा, महापौर

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नगर निगम की ओर से लाइफ जैकेट की व्यवस्था नहीं थी। यहां निगम की ओर से तैनात फायर के साजिद खान, सिविल के आरके सक्सेना व जेडओ 8 आलम गिर सहित गोताखोर गायब थे। इन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए।

योगेंद्र गुड्डू चौहान, पार्षद कांग्रेस

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Posted By: Nai Dunia News Network

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