भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। Nutrition Case पोषाहार आपूर्ति में निजी कंपनियों की भागीदारी से इनकार करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को सरकार पर हमला बोला। चौहान ने आरोप लगाया कि कैबिनेट को भरोसे में लिए बिना मुख्य सचिव ने कैबिनेट का फैसला कैसे बदल दिया? उन्होंने कहा कि कैबिनेट के निर्णय को मुख्य सचिव बदल दे तो कैबिनेट को इस्तीफा दे देना चाहिए।

चौहान ने सोमवार को मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि अफसरों और ठेकेदारों का गठजोड़ पोषण आहार व्यवस्था को निजी फर्मों को देकर जनता के पैसे की बंदरबाट करने की साजिश रच रहा है। उन्होंने इस बारे में सारे दस्तावेजों के साथ राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र भी लिखा। इसमें कहा गया कि प्रदेश में चल रही प्रशासनिक अराजकता के बारे में वे संज्ञान लें। शिवराज ने कांग्रेस सरकार से दस सवाल भी पूछे।

स्व सहायता समूहों को देने का फैसला लिया था हमारी कैबिनेट ने

चौहान ने कहा कि 13 मार्च 2018 को तत्कालीन कैबिनेट ने निर्णय लिया था कि टेक होम राशन का कार्य महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सात ऑटोमैटिक संयंत्र राज्य में स्थापित किए जाएंगे। साथ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पोषण आहार व्यवस्था से ठेकेदारों, प्राइवेट फर्म का काम स्व सहायता समूहों को देकर उन्हें सशक्त बनाया है।

संक्षेपिका के तथ्य बदले गए

चौहान ने आरोप लगाया कि 27 नवंबर 2019 को हुई कैबिनेट में पंचायत ग्रामीण विकास विभाग की तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गौरी सिंह के हस्ताक्षर से संक्षेपिका रखी गई। संक्षेपिका में निर्णय प्रारूप के क्रमांक 11 पर लिखा था 'यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एमपी एग्रो किसी भी रूप में निजी संस्था ठेकेदार या आउटसोर्स एजेंसी को टेक होम राशन उत्पादन/संचालन के कार्य में सम्मिलित नहीं करेगा।" मंत्रिपरिषद की बैठक में उपरोक्त बिंदु यथावत निर्णय में पारित किया गया पर मुख्य सचिव ने इसे बदल दिया।

शिवराज के सवाल

1- क्या यह सच है कि वित्त और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, दोनों ने प्रस्ताव दिया था कि पोषण आहार का कोई निजीकरण नहीं होना चाहिए?

2- क्या यह सच है कि कैबिनेट में भी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई?

3- क्या यह सच है कि तत्कालीन एसीएस गौरी सिंह ने कैबिनेट में विधिवत रूप से अपना पक्ष सरकार के समक्ष रखा?

4- क्या सह सच है कि निजी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया, लेकिन बाद में रिकॉर्ड में इसे बदल दिया गया। क्या कारण रहा इसे बदलने का?

5- क्या सह सच है कि इस तरह से निर्णय को हेरफेर कर बदलने से निजी कंपनियों को फायदा होगा?

6- क्यों राज्य के मुख्य सचिव ने, गलत तरीके से कैबिनेट के निर्णय को बदल दिया?

7- क्या यह उच्च न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन का प्रयास नहीं है?

8- क्या यह सच है कि भ्रष्टाचारी अफसरों, ठेकेदारों के दबाव में ही आपकी सरकार ने ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अफसर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर मजबूर किया?

9- कैबिनेट और उसके बाद हुए पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री स्पष्टीकरण देंगे?

10- क्या सरकार में अफसरों, ठेकेदारों और माफिया का गठजोड़ काम नहीं कर रहा है?

पोषाहार पर श्वेतपत्र जारी करे सरकार : मालू

राज्य खनिज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मालू ने पोषाहार व्यवस्था को लेकर कैबिनेट निर्णय बदलने को लेकर सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट का निर्णय मुख्य सचिव द्वारा बदले जाने के पीछे कौन है, यह सामने आना चाहिए?

Posted By: Hemant Upadhyay

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