- हड़ताल और गर्मी की छुट्टी के कारण शुक्रवार को होने वाले 36 ऑपरेशन टले

- ओपीडी में मरीजों को होना पड़ा परेशान

- कोलकाता में डॉक्टर पर हुए हमले के विरोध में हड़ताल पर थे डॉक्टर

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

हमीदिया अस्पताल में 2 और सुल्तानिया में शुक्रवार को सिर्फ 4 मरीजों के ऑपरेशन हुए। जबकि सामान्य दिनों में हमीदिया में औसतन 30 और सुल्तानिया में 10 मरीजों के ऑपरेशन होते हैं। इस तरह बाकी के 36 मरीजों के ऑपरेशन टल गए। अब इनका नंबर एक सप्ताह में आएगा, तब तक इन्हें परेशान होना पड़ेगा। ज्यादा दिक्कत हुई तो निजी अस्पतालों में रुपए खर्च कर ऑपरेशन कराने होंगे। वहीं सैकड़ों मरीजों का इलाज व जांच भी नहीं हो पाई। ये स्थिति डॉक्टरों की हड़ताल व गर्मी के दौरान आधे डॉक्टरों के छुट्टी पर होने के कारण बने। वहीं प्रदेशभर के अस्पतालों में 5 हजार से अधिक डॉक्टरों ने विरोध दर्ज कराया है। 17 जून को भी मरीजों को शुक्रवार की तरह परेशान होना पड़ सकता है क्योंकि इस दिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कोलकाता की घटना के विरोध में विरोध-प्रदर्शन व हड़ताल कर सकती है। ये हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कोलकाता में डॉक्टर पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में हो रही हैं।

ओपीडी में नहीं पहुंचे जूडा, पीजी स्टूडेंट ने संभाला मोर्चा

विरोध के लिए बुलाई हड़ताल के दौरान सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक जूडा डॉक्टर ओपीडी में नहीं पहुंचे। इसके कारण सामान्य बीमारियों का इलाज कराने पहुंचे मरीजों को परेशान होना पड़ा। कई मरीज तो बिना इलाज कराए ही लौट गए। कुछ मरीजों ने दोपहर 1 बजे तक इंतजार किया। इस बीच हमीदिया अस्पताल में कुछ पीजी स्टूडेंट ने मोर्चा संभाला। हालांकि वे भी सभी मरीजों को संतुष्ठ नहीं कर सकें। बता दें कि हमीदिया अस्पताल में कुछ डॉक्टर गर्मी की छुट्टी पर हैं। इसी बीच शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन व हड़ताल हो गई। इसके कारण मरीजों को परेशान होना पड़ा। वहीं सुल्तानिया अस्पताल में इमरजेंसी ऑपरेशन ही हुए। एम्स में भी घटना के विरोध में डॉ. अनुज जैन के नेतृत्व में डॉक्टरों ने विरोध दर्ज कराया। जेपी अस्पताल में डॉक्टरों ने कॉली पट्टी बांधकर काम किया।

विरोध दर्ज कराया

पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के 5 हजार से अधिक डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर ओपीडी व ऑपरेशन में काम किया। कई जगहों पर ओपीडी समय खत्म होने के बाद प्रदर्शन किया है। कलेक्टरों को ज्ञापन भी सौंपे हैं। साथ ही मांग की है कि केंद्रीय स्तर पर डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट बनाया जाए। साथ ही प्रदेश में पुलिस व डॉक्टरों के बीच समन्वय बैठक हों।

- डॉ. देंवेंद्र गोस्वामी, प्रसीटेंट मप्र मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन

आगे भी विरोध करेंगे

घटना के विरोध में शहर के सभी अस्पतालों में काली पट्टी बांधकर डॉक्टरों ने काम किया है। ठोस नतीजा नहीं निकला तो 17 जून को भी विरोध दर्ज करा सकते हैं।

- डॉ. अपूर्व त्रिपाठी, सचिव इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भोपाल ब्रांच