OBC Reservation in Madhya Pradesh : भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। शासकीय सेवाओं में पिछड़ों के आरक्षण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच पत्र युद्ध शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस मामले पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खुला पत्र भेजकर दांव खेला था, लेकिन शनिवार को शिवराज ने जवाबी चिट्ठी में कमल नाथ को आईना दिखाया है। उन्होंने दो टूक कहा कि आपकी सरकार ने एक वर्ष तक स्थगन निरस्त कराने के लिए कोई प्रयास ही नहीं किया और न ही न्यायालय में आठ माह तक आरक्षण के मामले में कोई प्रतिवाद दाखिल किया। शनिवार को कमल नाथ को लिखे जवाबी पत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके 18 जुलाई के पत्र की याद दिलाई है जिसमें कमल नाथ ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शासकीय सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था सुचारू रूप से लागू किए जाने पर जोर दिया था। शिवराज ने लिखा है कि आप अवगत होंगे कि मेरी सरकार अनुसूचित जाति, जन जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के कल्याण के लिए कटिबद्ध रही है।

विगत चार माह में कोरोना संकट के बावजूद इस दिशा में सरकार के कदमों से यह प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उन्होंने आरक्षण के मामले में उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका की ओर ध्यान दिलाया है जिसमें पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती दी गई है। शिवराज ने कमल नाथ को घेरते हुए लिखा है कि लगभग आठ माह तक याचिका में सरकार द्वारा कोई प्रतिवाद प्रस्तुत नहीं किया गया। इसकी वजह से उच्च न्यायालय ने 19 मार्च, 2019 को पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत से 27 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाए जाने के आपके निर्णय को स्थगित कर दिया। 19 मार्च, 2019 को न्यायालय के समक्ष आपकी सरकार के महााधिवक्ता उपस्थित भी नहीं हुए।

शिवराज ने लिखा है कि यह कांग्रेस सरकार की गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता ही थी कि लगभग आठ माह तक न्यायालय के समक्ष जवाब दावा प्रस्तुत नहीं किया गया और स्थगन को भी समाप्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया। न्यायालय के समक्ष आपने यह भी कहा कि लोक सेवा आयोग की नियुक्ति यों को बिना न्यायालय की पूर्वानुमति के अंतिम नहीं किया जाएगा। शिवराज ने कमल नाथ से कहा कि आप सहमत होंगे कि आपके नेतृत्व की सरकार ने इस याचिका में वह गंभीरता नहीं दिखाई जो आवश्यक थी। मेरी सरकार इस याचिका में प्रभावी रूप से अपना पक्ष रखने के लिए कटिबद्घ है। जिससे पिछड़ों के हितों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

मध्य प्रदेश में 53 प्रतिशत है पिछड़ों की आबादी

मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 86 प्रतिशत है। इसमें अकेले अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या करीब 53 प्रतिशत है। यही वजह है कि कमल नाथ ने शिवराज को पत्र लिखकर मामले को सियासी रंग देने की कोशिश की थी। कमल नाथ ने यहां तक लिखा था कि 'प्रिय शिवराज, मेरी ओबीसी आरक्षण की लड़ाई अब आपको लड़नी है' लेकिन शिवराज ने अब कमल नाथ को ही सवालों से घेर दिया।

Posted By: Prashant Pandey

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