भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव के बीच कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है, दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा को सौंप दिया। जानकारी के मुताबिक कमल नाथ को इस बात की आशंका थी कि राहुल लोधी उनका साथ छोड़ सकते हैं, इस दौरान उन्होंने लोधी से बात भी की थी। लेकिन उपचुनाव के पहले यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके बाद उन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि मध्य प्रदेश उपचुनाव में भाजपा सभी सीटों पर जीते।

जुलाई में इनके भाई प्रद्युम्न सिंह विधायक पद छोड़कर आए थे भाजपा में

जुलाई में राहुल लोधी के चचेरे भाई और प्रद्युम्न सिंह लोधी ने बड़ा मलहरा के विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। अब वे बड़ा मलहरा से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ रहे हैं। उस समय राहुल लोधी ने कहा था कि मैं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में नहीं जाऊंगा। लेकिन आज वे विधायक पद छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं।

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 55 का स्थान रिक्त होने की अधिसूचना जारी।

कांग्रेस का आरोप, सौदेबाजी का खेल अभी भी जारी

राहुल लोधी के कांग्रेस विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने पर कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट कर कहा कि 'प्रदेश पर 25 उपचुनाव थोपने वाली भाजपा अभी भी बाज नहीं आ रही है, लोकतंत्र की हत्या का खेल, सौदेबाज़ी का खेल अभी भी जारी है। चुनाव में अपनी संभावित हार देखते हुए खरीद फरोख्त का खेल फिर शुरू कर दिया है। जनता खुली आंखों से सब देख रही है, चुनाव में करारा जवाब देगी। प्रदेश को देश भर में इतना कलंकित करने के बाद भी इनका पेट नहीं भरा है, अभी भी प्रदेश के मतदाताओं का, जनादेश का अपमान करने में लगे हुए हैं। इनकी घृणित राजनीति का अगला शिकार जयंत मलैया हुए हैं। भाजपा अपने ईमानदार-निष्ठावान कार्यकर्ताओं का निरंतर हक मारते जा रही है।'

क्षेत्र के विकास और मेडिकल कॉलेज के लिए छोड़ दी कांग्रेस

दमोह। दमोह विधानसभा क्षेत्र से राहुल सिंह के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल होने पर राहुल सिंह का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के विकास और दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने के लिए कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है।

उनका कहना है की कांग्रेस सरकार के 14 माह के कार्यकाल में उन्होंने अनेक बार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से आग्रह किया था कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दमोह की जनता से वादा किया था कि वह दमोह में मेडिकल कॉलेज लेकर आएंगे, लेकिन कमलनाथ ने उनकी बात को कई बार नजरअंदाज किया, जिसे लेकर वह जनता के सामने खुद को छला हुआ महसूस कर रहे थे। इसके अलावा क्षेत्र के सभी विकास कार्य भी रुक गए थे। उन्होंने कहा कि विधायक होने के नाते लोग उनके पास अपेक्षाएं लेकर आते थे, जिन्हें पूरा नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने सोचा कि जिस जनता ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया है। यदि वह उसके लिए कुछ नहीं कर पाए तो उनका विधायक रहना बेकार है।

उन्होंने क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से चर्चा की और उनसे दमोह में मेडिकल कॉलेज लाने और दमोह को विशेष जिले का दर्जा देने की मांग रखी थी, जिसे शिवराज सिंह ने स्वीकार कर लिया और इसलिए उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है।

पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया बोले, घड़े में एक बूंद भी आती है तो फायदा होता है

दमोह। राहुल सिंह के भाजपा में शामिल होने के मामले में पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया का कहना है कि भाजपा के खेमे का विस्तार हो रहा है। राहुल के भाजपा में आने से पार्टी को होने वाले फायदे के सवाल पर उन्होंने कहा कि उपचुनाव का समय है, ऐसे समय घड़े में एक बूंद भी आती है तो उससे पार्टी को फायदा ही होगा। राहुल के आने से भी पार्टी मजबूत होगी। दमोह से आगामी चुनाव लड़ने पर उन्होंने कहा कि ये तो पार्टी तय करेगी कि दमोह में होने वाले आगामी उपचुनाव में प्रत्याशी कौन होगा।

Posted By: Prashant Pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस