भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। एक वर्ष पहले राजधानी में पहली बार पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की ग्ई थी। इसमें पुलिस को कई प्रशासनिक अधिकार भी हासिल हुए हैं। हालांकि नई व्यवस्था को समझने में पुलिस अधिकारियों को थोड़ा समय जरूर लगा, लेकिन वर्तमान में इसके कुछ सकारात्मक परिणाम भी सामने आएं हैं।

विशेषकर आदतन अपराधियों का बाउंड ओवर करने से उनमें पुलिस का खौफ बढ़ा है। साथ ही तकनीकी संसाधन मजबूत होने से साइबर अपराधियों पर नकेल कसने में भी काफी हद तक पुलिस को कामयाबी मिली है। उधर, पुलिस के तमाम प्रयासों के बाद भी वाहन चोरी की वारदातें लाइलाज मर्ज की तरह बनी हुई हैं। शहर की यातायात व्यवस्था को भी पटरी पर लाने में अभी काफी प्रयास किए जाने की जरूरत है। इस संबंध में नवदुनिया ने पुलिस आयुक्त मकरंद देऊसकर से पुलिस आयुक्त प्रणाली के एक वर्ष पूर्ण होने पर विशेष बातचीत की।

सवाल- पुलिस आयुक्त प्रणाली को एक साल पूरा हो गया है। इस दौरान क्या कामयाबी रही?

जवाब- पुलिस आयुक्त प्रणाली पुलिस आयुक्त, उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त के न्यायालय से जुड़ा हुआ है। पुलिस कमिश्नर प्रणाली और पुलिस अधीक्षक प्रणाली में जो फर्क है, मुख्य रूप से शक्तियों का रहता है। उसका उपयोग सभी तरह से आयुक्त प्रणाली में तैनात सहायक आयुक्त और उपायुक्त ने अच्छी तरह से किया है। इसका परिणाम यह देखने को मिला कि जितने आदतन अपराधी और अपराधी थे, उनकी आपराधिक वारदात करने में कमी आई है। इन अपराधियों पर कार्रवाई करने के कारण आदतन अपराधी की वारदात करने में करीब पचास फीसदी गिरावट आई है। यह पुलिस आयुक्त प्रणाली की सबसे बड़ी कामयाबी रही है। इस दौरान जो भी चुनौतियां सामने आई, उसकी पूरी टीम ने मिलकर संभाला है।

सवाल- पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद महिला संबंधी अपराध बढ़े हैं?

जवाब- नाबालिगों के अपहरण और गुमशुदगी में उनकी सकुशल तलाश कर स्वजनों को सौंपने में सफलता मिली है। रही बात महिलाओं के साथ दुष्कर्म की तो सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामलों में भोपाल में 405 प्रकरण 30 नवंबर तक दर्ज हुए हैं। उनमें से 198 शादी का झांसा देकर हुए ,195 प्रकरण में पीड़िता के परिचित थे। बाकी प्रकरण में अपरिचित थे। दुष्कर्म के मामले बढ़े जरूर हैं, लेकिन एक बात आपको माननी पड़ेगी कि उन महिलाओं की सुनवाई हुई और उस पर कार्रवाई की गई। इस प्रकार के अपराधों को देखते हुए पुलिस आयुक्त प्रणाली में कई बस्तियों में जाकर पुलिस ने जागरूकता अभियान चलाया था जिन इलाकों से नाबालिग के अपहरण और उनके साथ छेड़खानी के मामले हुए, वहां पर पुलिस टीम पहुंचकर कार्यशालाएं आयोजित की गई। इसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। इन कार्यशालाओं से शिकायत मिली है, जो सामाजिक लोकलाज से शिकायत नहीं करते हैं। ऐसे पीड़ितों को हम लोग ढूंढकर लाए और ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की।

सवाल - आगे क्या प्रयास रहेंगे, अगले साल की क्या योजना है?

जवाब- अभी हमारी नई योजना में धारा 110 और 116 में अभियुक्त को बाउंड ओवर किया है। उन बदमाशों की जमानत लेने वाले लोगों की पहचान कर उनसे राशि वसूलना है। करीब साढ़े तीन सौ ऐसे बदमाश हैं, जिनको बाउंड ओवर भरने के बाद दोबारा वारदात की है। हमारा मकसद किसी को जेल भिजवाया नहीं है, हमारा उद्देश्य आपराधिक घटनाओं को रोकना है। अगले साल हमारा प्रयास रहेगा कि जिन लोगों ने बंध पत्र भरा है, वह घटनाएं नहीं करें। जमानतदारों में अधिकांश तो आरोपितों के रिश्तेदार और करीबी परिचित रहते हैं, उनके माध्यम से दबाव बनाकर बदमाशों को अपराध करने से रोकेंगे।

सवाल- जघन्य महिला अपराधों पर अंकुश कैसे लगाएंगे?

जवाब- इस साल जो हत्याओं के मामले सामने आए हैं उसमें अधिकांश हत्याएं घरेलू हिंसा को लेकर हुई हैं। हमारे यहां दो तरह की हत्याएं हुई हैं। पहला पति ने पत्नी को मार दिया या पत्नी ने पति को मरवा दिया, दूसरा पड़ोसियों से विवाद में हत्या हुई हैं। इस प्रकार की वारदात को रोकने के लिए योजना बनाई जा रही है। नाबालिगों के प्रेम प्रसंग के मामले सामने आने पर उनकी काउंसलिंग कर उन्हें समझाइश दी जाएगी।

सवाल- पुलिस आयुक्त प्रणाली में साइबर सेल की क्या भूमिका रही?

जवाब- साइबर सेल ने आनलाइन धोखाधड़ी, ओटीपी, अश्लील वीडियो के नाम पर ब्लैकमेलिंग, बिजली बिल के नाम पर ठगी के अपराधों की विवेचना कर उनका राजफाश किया है। साइबर सेल ने लापता बच्चों को तलाशने में अच्छा काम किया है। अभी हाल में ही डाक्टर को ब्लैकमेल कर उससे एक करोड़ वसूलने की तैयारी का मामला सामने आया है, जो बिल्कुल नया तरीका था, साइबर सेल ने आरोपितों की पहचान कर उनको गिरफ्तार किया है। इसके अलावा और भी कई अच्छी जांच कर आरोपितों को पकड़ा है। अब हमारी तैयारी थाना स्तर पर साइबर की जांच करने वाले पुलिसकर्मियों को तैयार करना है जो ओटीपी धोखाधड़ी के मामलों को थाना स्तर पर सुलझाएंगे। सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर सामान्य साइबर धोखाधड़ी के मामले अच्छी जांच कर सकें।

Posted By: Ravindra Soni

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