भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। जिला उपभोक्ता फोरम अब जिला उपभोक्ता आयोग के नाम से जाने जाएंगे। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत लागू किए गए नए नियम के तहत अब एक करोड़ रुपए तक का दावा जिला आयोग में किया जा सकता है। पहले सिर्फ 20 लाख रुपए तक के दावे उपभोक्ता फोरम में सुने जाने का अधिकार था। ऑनलाइन और टेलीशॉपिंग के विवाद को भी अब उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में ले लिया गया है। राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जस्टिस शांतनु केमकर ने नईदुनिया के साथ बातचीत में बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का नया कानून 20 जुलाई 2020 से देशभर में लागू हो गया है। इस नए कानून में उपभोक्ता के हित में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है।

जस्टिस केमकर ने बताया कि नए कानून में कंज्यूमर मेडिएशन सेल का गठन अनिवार्य किया गया है। उसके लिए पैनल नियुक्त किए जाएंगे। इसे ऐसे समझ सकते हैं। जैसे किसी मामले में जैसे कि विवाद की राशि एक लाख रु. हो तो ऐसे मामलों में मेडिएशन सेल बेहतर भूमिका निभा सकती है। दोनों पक्षों के साथ बैठकर विशेषज्ञ पैनल के सदस्य सुलभ और सहज तरीके से मामले का निराकरण कर सकते हैं। इससे सभी का समय बचेगा कोर्ट में भी मामलों कि संख्या नहीं बढ़ेगी। जस्टिस केमकर ने बताया नए एक्ट में फोरम के मेंबर्स को अब तक प्रति सीटिंग दी जाने वाली राशि को राज्य स्तर पर अतिरिक्त सचिव और जिला स्तर पर उप सचिव के वेतन स्तर पर कर दी है। इससे उपभोक्ता आयोग के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और बेहतर मेंबर इससे जुड़ सकेंगे।

नए एक्ट में मिले विशेष अधिकार

- अब कोई भी उपभोक्ता अपने क्षेत्र के अलावा किसी भी जिला उपभोक्ता आयोग में वाद प्रस्तुत कर सकता है। इससे पहले उपभोक्ता को उसी क्षेत्र में दावा लगाना पड़ता था जहां से कोई प्रोडक्ट लिया था।

- ऑनलाइन और टेलीशॉपिंग के विवाद पहले कानून के दायरे में नहीं थे। अब इन्हें उपभोक्ता संरक्षण कानून में शामिल कर लिया गया है।

- अब तक जिला उपभोक्ता फोरम से अपील के लिए 30 दिन का समय दिया जाता था, अब इसको 45 दिन कर दिया गया है।

- अब तक राज्य स्तर पर अपील 25000 रुपये जमा कर की जा सकती थी। किंतु आप दावा राशि का 50 फीसद जमा करनी होगी। इससे उपभोक्ताओं को अपील के बावजूद 50 फीसद राशि की राहत मिल जाएगी।

- स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन को एक करोड़ से अधिक 10 करोड़ तक की सुनवाई का अधिकार एवम नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन को 10 करोड़ से अधिक की सुनवाई का अधिकार दिया गया है।

- अब तक जिला उपभोक्ता आयोग एवम राज्य आयोग को किसी मामले में रिव्यू का अधिकार नहीं था। नए एक्ट में रिव्यू करने का अधिकार दे दिया गया।

Posted By: Prashant Pandey

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