भोपाल। प्रदेश के 4.64 लाख पेंशनर्स महंगाई भत्ता नहीं बढ़ाने को लेकर सरकार से खफा हैं। जबलपुर में पेंशनर्स प्रदर्शन कर चुके हैं और भोपाल में इसकी तैयारी चल रही है।

पेंशनर्स एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि जो पेंशनर्स के साथ नहीं, वे भी उनके साथ नहीं हैं। छत्तीसगढ़ में भी पेंशनर्स ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश में सरकार ने दो दिन पहले राज्य के कर्मचारियों का डीए नौ फीसदी करने के आदेश जारी किए हैं, जबकि पेंशनर्स को पांच प्रतिशत डीए मिल रहा है।

प्रदेश में पेंशनर्स के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है। कर्मचारियों के साथ पहले तो इन्हें सातवां वेतनमान नहीं दिया। जब दबाव बना तो शिवराज सरकार ने इसकी घोषणा कर दी पर 18 माह का एरियर नहीं देने का फैसला किया। जबकि, इसका वादा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास में हुई पेंशनर्स पंचायत में किया था। इसके बाद भी वित्त विभाग ने खजाने की हालात का हवाला देते हुए इसे क्रियान्वित नहीं किया।

कांग्रेस सरकार बनने के बाद पेंशनर्स को उम्मीद थी कि लंबित डीए के साथ सातवें वेतनमान के एरियर को लेकर भी सरकार फैसला करेगी पर ऐसा नहीं हुआ। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार डीए बढ़ाने पर सहमति नहीं दे रही है। पहले भी इसी कारण डीए नहीं बढ़ पाया था। उधर, छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले दिनों पेंशनर्स एसोसिएशन से खजाने की स्थिति का हवाला देते हुए डीए नहीं बढ़ाने की बात कही है।

उधर, प्रदेश की पेंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेशदत्त जोशी ने बताया कि दोनों राज्यों में एक ही दल की सरकार है। ऐसे में डीए बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाने का मतलब यह है कि पेंशनर्स उनकी प्राथमिकता में नहीं है। जबलपुर में पेंशनर्स ने डीए नहीं बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन किया है। हम भी लगातार सरकार से चर्चा कर रहे हैं पर आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिल रहा है।

पेंशनर्स ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ इस उम्मीद के साथ दिया था कि उनके साथ न्याय होगा। वचन पत्र में भी पार्टी ने इसका जिक्र किया है। इसके बावजूद अब तक निराशा ही हाथ लगी है। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में पेंशनर्स अपनी अलग राह पकड़ सकते हैं।

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