भोपाल। नर्मदा कैचमेंट में पौधारोपण को लेकर प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान, पूर्व वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार पर कमलनाथ सरकार ने निशाना साधा है। पौधारोपण की प्रारंभिक रिपोर्ट शुक्रवार को मीडिया से साझा करते हुए वनमंत्री उमंग सिंघार ने अभियान में 450 करोड़ के आर्थिक घोटाले के साक्ष्य मिलने की पुष्टि की है।

सिंघार ने इसके लिए सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री चौहान, पूर्व वन मंत्री डॉ. शेजवार, वन विभाग में विकास शाखा के प्रमुख वाय. सत्यम और अभियान के नोडल अधिकारी बीबी सिंह सहित अन्य जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ ईओडब्ल्यू को प्रकरण सौंपने की तैयारी कर ली है।

वनमंत्री सिंघार ने पत्रकारों को बताया कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में रिकॉर्ड दर्ज कराने के लालच में पूववर्ती सरकार ने दो जुलाई 2017 को आनन-फानन में पौधारोपण अभियान चलाया। प्रदेश में पांच करोड़ पौधे नहीं थे, तो दूसरे राज्यों से पौधे खरीदने की अनुमति दी गई। जेसीबी से गड्ढे खुदवाए गए। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी थी कि दो महीने की तैयारी में सात करोड़ पौधे रोपने पड़े।

सिंघार ने कहा कि रोपने योग्य पौधे कम से कम दो साल में तैयार होते हैं। फिर भी सिर्फ रिकॉर्ड के लिए सरकार ने पैसा पानी की तरह बहा दिया। सिंघार ने कहा कि पौधारोपण के नाम पर सीधा-सीधा घोटाला किया गया है, जो मैदानी जांच में प्रमाणित हो चुका है इसलिए आगे की कार्यवाही के लिए यह मामला ईओडब्ल्यू को सौंप रहे हैं।

मंत्रालय से गायब हुई फाइल

मंत्री सिंघार ने बताया कि इस घोटाले को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया और अब इसे छिपाने की पूरी कोशिश की जा रही है। सरकार के पास एक दिन में सात करोड़ पौधे रोपे जाने का रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज कराने को लेकर कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। यह फाइल मंत्रालय से गायब हो गई है।

अफसरों के पक्ष में मंत्री

मंत्री ने अभियान के लिए तत्कालीन विभाग प्रमुख से लेकर अन्य अफसरों को क्लीनचिट दे दी है। उन्होंने कहा कि विभाग के अफसरों ने पहले ही साफ कर दिया था कि इतने कम समय में पौधे नहीं लगाए जा सकते हैं और प्रदेश में पौधों का इंतजाम भी नहीं है, लेकिन उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री चौहान के दबाव में काम करना पड़ा।

अभी विभाग कर रहे कार्यवाही

घोटाले की जांच के लिए बनाई गई चार मंत्रियों की कमेटी की बैठक न होने पर मंत्री सिंघार ने कहा कि वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया था इसलिए मैंने जिम्मेदारी से पहले जांच करा ली। शेष विभाग भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने इस अभियान पर 135 करोड़ रुपए खर्च किए थे और वर्तमान में पांच से 10 फीसदी पौधे ही जीवित हैं। सिंघार ने कहा कि बैतूल में जांच के दौरान पता चला कि 15 हजार में से सिर्फ नौ हजार गड्ढे किए गए थे और पौधे भी कम रोपे गए।

300 रुपए में पौधे खरीदे

सात करोड़ का लक्ष्य पूरा करने के लिए अफसरों को कहीं से भी और किसी भी कीमत पर पौधे खरीदने की छूट दी गई थी। मंत्री ने कहा कि कई विभागों ने 10 और 20 रुपए का पौधा 200 एवं 300 रुपए में खरीदा है।

जितनी चाहें जांच करा लें

आरोप बे-बुुनियाद हैं। जितना टारगेट दिया था, उतना काम किया है। बाद में हमने जीवितता की स्थिति भी दिखवाई है। पौधे सही स्थिति में हैं। कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। जितनी चाहें जांच करा लें।

- डॉ. गौरीशंकर शेजवार, पूर्व वनमंत्री

मई में ही हटा दिया था

मुझे अभियान का नोडल अधिकारी जरूर बनाया गया था और मैंने तीन बैठकें भी ली थीं, लेकिन मैंने वरिष्ठों को जब यह बताया कि पौधे कमजोर हैं। जितना टारगेट ले रहे हैं, उतने लगाना संभव नहीं है, तो मुझे मई 2017 में अभियान से हटने के मौखिक निर्देश दिए गए। इसके बाद वाय सत्यम को यह जिम्मा सौंपा गया।

- बीबी सिंह, एपीसीसीएफ

Posted By: Hemant Upadhyay