भोपाल। सवा दो साल पहले प्रदेश में कराए गए पौधारोपण की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपने का फैसला अब मुख्यमंत्री कमलनाथ लेंगे। वन विभाग ने यह नस्ती भी मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दी है। वनमंत्री उमंग सिंघार ने 10 अक्टूबर को ईओडब्ल्यू को जांच सौंपने की अनुशंसा करते हुए फाइल वन सचिवालय को भेजी थी। विभाग के अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव ने इसे आगे बढ़ा दिया है। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार और तत्कालीन वन अफसरों के नाम हैं।

शिवराज सरकार ने दो जुलाई 2017 को नर्मदा कैचमेंट सहित प्रदेश में सात करोड़ पौधे रोपे थे। जिसमें बड़ी मात्रा में गड़बड़ी सामने आई है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले भी मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग करती रही और सरकार में आते ही अलग-अलग पांच जांचें भी करा दीं।

इन्हीं जांचों के आधार पर 10 अक्टूबर को वनमंत्री उमंग सिंघार ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, तत्कालीन वन बल प्रमुख डॉ. अनिमेष शुक्ला, अभियान प्रमुख एवं विकास शाखा के तत्कालीन एपीसीसीएफ वाय सत्यम के खिलाफ ईओडब्ल्यू को जांच सौंपने की अनुशंसा की है। मंत्री ने विभाग के एसीएस को यह निर्देश दिए थे, लेकिन वन सचिवालय ने मामला सीएम सचिवालय के पाले में डाल दिया है। सूत्र बताते हैं कि गुरुवार को ही यह नस्ती सीएम सचिवालय को भेज दी गई है।

कार्य विभाजन की नस्ती भी सीएम को भेजी

विभाग के एसीएस एपी श्रीवास्तव ने वन सचिवालय में पदस्थ अफसरों के बीच कार्य विभाजन की नस्ती भी सीएम सचिवालय को भेज दी है। इसमें वनमंत्री सिंघार ने अपने स्तर से अफसरों के बीच कार्य विभाजन कर दिया है। कार्य विभाजन में एसीएस से तमाम जिम्मेदारियां छीनकर उनके अधिनस्थ अफसरों को सौंप दी हैं। इस कारण एसीएस श्रीवास्तव वनमंत्री से नाराज चल रहे हैं।

इनका कहना है

नियम अनुसार जिसे निर्णय लेना है, वहीं लेगा। उसी हिसाब से कार्रवाई की जा रही है।

एपी श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, वन

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Posted By: Hemant Upadhyay